242 17-12-1946 समय और परिस्थितियों को अनुकूल बनाया जाए तो दुनिया की कोई भी शक्ति इस देश को एक होने से रोक नहीं सकती - नई दिल्ली - Page 63

44 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अगर तैयार करना हो तो, पूर्वाग्रह के कारण जो अभी भी शामिल होने के लिए तैयार नहीं हैं ऐसे घटकों को मुख्य धारा में शामिल करना होगा और ऐसा करने के लिए उन्हें कुछ रियायतें देनी पड़ें तो देने की कूटनीतिक चतुरता बहुसंख्यक पक्ष दिखाएं यह बताने के लिए मैं यह आह्वान कर रहा हूं। मन में डर पैदा करने वाले नारों और शब्दों को हम दूर रखते हैं। हमारे विरोधियों की मानसिकता और पूर्वाग्रहों को ध्यान में रखते हुए हम उन्हें कुछ रियायतें देंगे। उन्हें भी अपने साथ कर लेंगे। हम जिस मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं उस मार्ग पर अपनी मर्जी से वे हमारे साथ हो लेंगे। इस मार्ग पर लंबे समय तक हम अगर साथ चलते रहे तो ही हम एकता की दिशा में आगे बढ़ेंगे। आयु. जयकर की उपसूचना का मैं यहां केवल इसलिए समर्थन कर रहा हूं कि हम सबको इस बात का अहसास हो कि साथ मिलकर आगे बढ़ना ही इस समय बहुत महत्वपूर्ण है। सबको इसका अहसास होना जरूरी है। हम सही हों या गलत, हमारे कानूनी अधिकारों के साथ हमारी भूमिका मेल खा रही हो अथवा न खा रही हो, 16 मई अथवा 6 दिसंबर के निवेदनों के अनकूल हो अथवा न हो - ये सारी बातें कुछ समय के लिए हम किनारे रखें। कानूनी मुद्दे से भी यह मसला अधिक महत्वपूर्ण है, बल्कि यह कानूनी मुद्दा है ही नहीं। कानून की सभी बातें हम दूर रखते हैं और ऐसी कोशिश करते हैं कि जो लोग आज हमारा साथ देने के लिए तैयार नहीं हैं वे भी साथ देने के लिए तैयार हो जाएं। मैं आप सब लोगों से आह्वान करता हूं कि हम ऐसा माहौल तैयार करें।

इस सदन में चल रही चर्चा में दो सवाल विचारार्थ रखे गए हैं। इन सवालों का मेरे मन पर इतना गहरा असर हुआ कि मैंने उन्हें दर्ज कर रखा है। उनमें से एक सवाल मेरे मित्र बिहार के मुख्यमंत्री ने कल की सभा में अपने भाषण में उपस्थित किया था। वह पूछ रहे थे कि मुस्लिम लीग को इस संविधान सभा में सहयोगी होने से प्रस्तुत प्रस्ताव कैसे रोक सकता है? आज मेरे मित्र डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने दूसरा प्रश्न उपस्थित किया कि कैबिनेट मिशन के प्रस्ताव से यह प्रस्ताव अलग तो नहीं? महोदय, ये दोनों सवाल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और उनके केवल जवाब, नहीं स्पष्ट जवाब दिए जाने चाहिए। मुझे साफ तौर पर ऐसा लगता है कि प्रस्तुत प्रस्ताव से कुछ निकलने का उद्देश्य हो या ना हो, यह केवल आकस्मिक घटना हो या न हो, लेकिन इस प्रस्ताव का निश्चित परिणाम मुस्लिम लीग को संविधान सभा से बाहर रखने में ही होने वाला है। इस संदर्भ में प्रस्ताव के तीसरे परिच्छेद की ओर मैं आपका ध्यान दिलाना चाहता हूं क्योंकि, मुझे लगता है कि यह परिच्छेद अत्यंत महत्वपूर्ण और अर्थपूर्ण है। तीसरे परिच्छेद में भारत के भावी संविधान के बारे में विचार किया गया है। प्रस्ताव रखने वाला इसके जरिए क्या कहना चाहता है मैं नहीं जानता। लेकिन मैं यह मान कर चलता हूं कि मंजूर होने के बाद यह प्रस्ताव तीसरे परिच्छेद के संदर्भ से संविधान निर्माण के लिए संविधान सभा के निर्देशन का काम करेगा। क्या कहा है इस तीसरे परिच्छेद में? तीसरा परिच्छेद कह रहा है कि इस देश में राज्य संस्था के दो प्रकार होंगे। पहला- निचले स्तर पर स्वायत्त प्रांत अथवा राज्य अथवा ऐसे हिस्से होंगे जो अखंड भारत में शामिल होना चाहते हैं। ये स्वायत्त घटक पूरी तरह अधिकारयुक्त होंगे। उनके कुछ