242 17-12-1946 समय और परिस्थितियों को अनुकूल बनाया जाए तो दुनिया की कोई भी शक्ति इस देश को एक होने से रोक नहीं सकती - नई दिल्ली - Page 64

 45

अन्य अधिकार भी होंगे। घटक प्रांत के ऊपरी स्तर पर संघ राज्य होंगे। कुछ हद तक उन्हें कानून बनाने, उन पर अमल करने और प्रशासन चलाने के अधिकार होंगे। प्रस्ताव का यह हिस्सा पढ़ते हुए सम्मिलित करने की संकल्पना के संदर्भ और एक तरफ केंद्र सरकार और दूसरी तरफ के प्रांतीय सरकारों के बीच संपर्क बनाए रखने वाली व्यवस्था मुझे कहीं दिखाई नहीं दे रही। कॅबिनेट मिशन के प्रस्ताव की पृष्ठभूमि पर इस परिच्छेद को पढ़ने के बाद या कांग्रेस की वर्धा में परिषद में पारित किए गए प्रस्तावों की पृष्ठभूमि में इस परिच्छेद को पढ़ने के बाद भी प्रांतों के एकीकरण की संकल्पनाओं के संदर्भ में मुझे कहीं नहीं दिखाई देते। इसलिए मानना ही पड़ेगा कि मैं बेहद आश्चर्यचकित हूं। इस प्रकार अलग गुट बनाने की कल्पना जाती तौर पर मुझे स्वीकार नहीं। (सुनो....सुनो...)। मुझे मजबूत केंद्र सरकार पसंद है। (सुनो....सुनो...)। 1935 में भारत सरकार कानून द्वारा तैयार किए गए केंद्र सरकार से भी अधिक मजबूत केंद्र सरकार मुझे चाहिए। लेकिन महोदय, मेरे इन मतों को वर्तमान स्थिति में कहीं स्थान है ऐसा मुझे दिखाई नहीं देता। हमने काफी लंबी यात्रा की है। मेरी नजर में जिसे बेहद प्रशंसनीय, सम्मानजनक और आश्रय का स्थान माना जाए ऐसी 150 साल की प्रशासनिक व्यवस्था से निर्माण हुई मजबूत केंद्र सरकार को डिगाने की सहमति काँग्रेस पक्ष ने क्यों दी यह काँग्रेस ही जाने। इस भूमिका का त्याग करने के बाद तथा हमें मजबूत केंद्र सरकार नहीं चाहिए ऐसी भूमिका अपनाने के बाद, घटक राज्य तथा केंद्र सरकार को जोड़ने वाली बीच की उपसंघराज्य की कड़ी स्वीकारने के बाद परिच्छेद 3 में शामिल करने की योजना का जिक्र क्यों नहीं किया गया यह मैं जानना चाहता हूं। एकत्रीकरण से संबंधित धाराओं को ठीक से समझने में काँग्रेस पक्ष, मुस्लिम लीग और अंग्रेज सरकार सहमत नहीं हो पा रहे हैं यह मैं समझ सकता हूं। मैंने इस बारे में सोचा है और अगर मैं गलत हूं यह कोई सप्रमाण मुझे समझा दे तो मैं अपनी राय में सुधार लाने को तैयार हूं कि विभिन्न गुटों में विभाजित राज्यों द्वारा अगर संघराज्य अथवा उप संघराज्य को मान्यता दी जाए तो काँग्रेस इस प्रस्ताव का विरोध नहीं करेगी इस बात को कम से कम काँग्रेस ने माना था। काँग्रेस की यही सोच है इसका मुझे भरोसा है। मेरा सवाल है कि प्रस्ताव रखने वाले व्यक्ति द्वारा उसे तथा उसके पक्ष की जिस बात पर सहमति है उन प्रांतों की एकता या प्रांतों के एकीकरण की बात का जिक्र प्रस्ताव में क्यों नहीं किया गया है? इस प्रस्ताव में संघ की कल्पना को पूरी तरह टाला क्यों गया है? इस बात का जो भी जवाब हो, वह मुझे इस प्रस्ताव में दिखाई नहीं दे रहा। इसलिए, मैं कहना चाहता हूं कि, बिहार के प्रधान और डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी द्वारा उपस्थित किए गए दो सवालों का परिच्छेद 3 यह जवाब है। उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए दो सवालों में से पहला सवाल यह है कि, 16 मई के प्रस्ताव के साथ यह प्रस्ताव अलग कैसे है? और दूसरा सवाल है- संविधान सभा में मुस्लीम लीग के प्रवेश पर यह प्रस्ताव क्यों प्रतिबंध लगाता है? निश्चित तौर पर मुस्लीम लीग इस बात का फायदा उठाएगा और अपनी लगातार अनुपस्थिति का समर्थन करेगा। महोदय, मेरे मित्र डॉ. जयकर द्वारा इस प्रस्ताव से संबंधित निर्णय को मुल्तवी किए जाने को लेकर जो दलील प्रस्तुत की थी उसे मैं कुछ हद तक कानूनी कह सकता हूं, भले ही इससे उन्हें