243 फरवरी/मार्च सत्य की खोज के लिए मनुष्य को पूरी आजादी मिलनी चाहिए 1947 - मुंबई - Page 67

48 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कोशिश में लगे रहना होगा। एक बार की जीत हमेशा की जीत साबित नहीं होगी।

अब तक मैंने जितना समय लिया उससे अधिक समय मैं नहीं लेना चाहता। एक बार फिर बर्क को उर्द्धृत कर मैं भाषण को समाप्त करना चाहता हूं। बर्क ने एक जगह कहा है कि, ‘सत्ता देना आसान है, अकल देना मुश्किल है।’ इस सभा को प्राप्त सार्वभौम अधिकार का प्रयोग अकल के साथ करने के लिए हम तैयार हैं, यह हम अपने आचरण से साबित करेंगे। देश के सभी घटकों को अपने साथ ले चलने का यही एकमात्र उपाय है। एकता की ओर आगे बढ़ने का इसके अलावा कोई और मार्ग नहीं। इस बारे में आपके मन में कोई आशंका नहीं होनी चाहिए।’’ ख्1,

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सत्य की खोज के लिए मनुष्य को पूरी आजादी मिले

टिप्पणीः नवयुग के इस अंक में भाषण कब हुआ इसका जिक्र नहीं है लेकिन शिक्षा सत्र के अंत में होने का जिक्र है। इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि भाषण फरवरी-मार्च, 1947 के आसपास हुआ होगा। -संपादक)

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने दिनांक 8 जुलाई, 1945 को ‘पीपल्स एज्युकेशन सोसाइटी’ की स्थापना की। केवल शिक्षा प्रदान करना ही नहीं वरन भारत में बौद्धिक, सामाजिक और नैतिक प्रजातंत्र का प्रचालन सुचारू रूप से हो सके ऐसी शिक्षा देना इस सोसाइटी का उद्देश्य था। संस्था ने 20 जून, 1946 के दिन मुंबई में सिद्धार्थ कला एवं विज्ञान महाविद्यालय की स्थापना की।

सिद्धार्थ कॉलेज के पहले साल के अंत में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने भाषण दिया -

उन्होंने भाषण में कहा- आपके प्रिन्सिपल साहब ने आपको बताया कि हमारा सिद्धार्थ कॉलेज शैशवावस्था में होने के कारण उसे अभी अपनी परंपरा निर्माण करनी है। मुझे व्याख्यान देने का मौका आप लोगों ने दिया है उसका फायदा उठाते हुए अब मैं ‘हमारे कॉलेज की परंपरा’ विषय पर ही करने जा रहा हूं। लेकिन अपनी बात शुरू करने से पहले मैं आजकल के छात्रों को दो शब्द कहना चाहता हूं। 1923 से 1937 तक दो साल मैं सिडनहॅम कॉलेज में प्रोफेसर था और इसी दौरान यहां के लॉ कॉलेज का भी मैं प्रिंसिपल था। 1937 के बाद छात्रों से मेरा संपर्क टूटा। तब से मैंने प्रोफेसर का पेशा छोड़कर राजनीति को अपनाया। राजनीति में मनुष्य को अपनी एक विशिष्ट मनोभूमिका नवयुगः 13 अप्रैल, 1947