243 फरवरी/मार्च सत्य की खोज के लिए मनुष्य को पूरी आजादी मिलनी चाहिए 1947 - मुंबई - Page 70

 51

आपकी तर्कशक्ति अगर उस बात को सच मानती हो तभी उसको स्वीकार कीजिए। वरना बेझिझक उसे छोड़ दीजिए। यही मेरी आपको सीख है।’

गौतम बुद्ध के इस कथन का क्या मतलब है? इसका मतलब यही है कि हर व्यक्ति को सोचने की आजादी है। उस आजादी का इस्तेमाल उसे सत्य को ढूंढने के लिए करना चाहिए और सत्य के मायने क्या हैं? व्यक्ति के पंच कर्मेंद्रियों और पंच ज्ञानेंद्रियों को जो सही लगे वही सत्य है। यानी कि, सत्य दिखाई दे, सुनाई दे, उसे हम सूंघ सकें, उसका स्वाद ले सकें और उसके अस्तित्व के बारे में हम लोगों को यकीन दिला सकें।

गौतम ने अपने शिष्यों के आगे यही उद्देश्य रखे थे। सिद्धार्थ कॉलेज भी इन्हीं लक्ष्यों का अनुसरण करने वाला है - 1. सत्य को खोज निकालना, 2. मानवता की सीख देने वाले धर्म का ही अनुसरण करना।

आधुनिक विचार प्रणाली किस दिशा में आगे बढ़ रही है मैं जानता हूं। मैं आपसे यह भी कह देता हूं कि कार्ल मार्क्स के दर्शन से भी मैं अवगत हूं। उसके धार्मिक विचारों के बारे में भी मैं जानता हूं। धर्म को वह अफू कहता है। लेकिन उसका यह कथन मुझे स्वीकार नहीं। सत्य को खोज निकालना यही सत्यधर्म होता है। सत्य और सत्ता परस्पर विरोधी बातें हैं। शास्त्र भी किसी बात को परिपूर्ण या अंतिम नहीं मानता। इसीलिए सत्य भी अधूरा होने के कारण कालानुसार बार-बार उसे खोजना क्रमप्राप्त है। इसी कारण दुनिया में पूरी तरह पवित्र कुछ भी नहीं।

धर्म यानी सत्य यह हमें सीखना होगा। नहि सत्यात्परो धर्मः! यानी, सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं। हमारा लक्ष्य भी यही हो। हम किसी और को कभी दुख न पहुचाएं। यही हमारे धर्म की सीख होनी चाहिए। सत्य खोजने में व्यक्ति को पूरी आजादी मिले यही अपने इस कॉलेज का लक्ष्य हो।