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मेरा मानना तो यह है कि, प्रोफेसर अपने अध्ययन और अध्यापन के काम में अपने को इस तरह समर्पित कर लें कि अपने घर का खयाल रखने तक के लिए उनके पास फुर्सत न हो। वह काम पूरी तरह उनकी पत्नी के ही सुपूर्द हो। प्रोफेसर बेकार के काम अपने जिम्मे लेकर अपनी जिम्मेदारियां बढ़ाएं यह मुझे मंजूर नहीं। अध्ययन-अध्यापन में अनुसंधान भी शामिल है। इन तीन बातों के अलावा प्रोफेसरों को कोई अन्य काम नहीं करना चाहिए।