246 14-4-1947 देश को आजाद करने की राह में बाधाएं पैदा नहीं करना मेरी नीति है - मुंबई - Page 75

56 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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देश की आजादी के मार्ग में बाधाएं उत्पन्न

करना मेरी नीति नहीं है

दिनांक 14 अप्रैल, 1947 के दिन मान्यवर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के 55वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में बहुसंख्य अस्पृश्यों ने चमक-दमक के साथ डॉ. बाबासाहेब का सार्वजनिक सम्मान किया। इस अवसर पर दलित वर्ग को संबोधित करते हुए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा-

अखिल भारत की दलित जनता को अपनी विकृत स्थिति के बारे में अहसास होने के कारण अब वह अपने जीवन को परिपूर्णता की दिशा में ले जाने के लिए संगठित होकर चल पड़ी है। अब उसका भविष्य उज्ज्वल बनेगा यह सोच कर मैं आनंद-विभोर हो जाता हूं। उस दिन वॉइसरॉय को मैंने साफ शब्दों में कह दिया, ‘‘आपने अगर मुझे बुलाया नहीं होता तो मैं आपसे मिलने आता ही नहीं। अंग्रेजों के पीछे भागते फिरने की मेरी इच्छा नहीं।‘‘ किसी जमाने में दलित समाज के सुख संवर्धन की जिम्मेदारी अंग्रेजों ने खुद कंधों पर ली थी। उस वक्त मुझे लगा था कि अंग्रेज अपनी बात को सच कर दिखाएंगे, अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के लिए कदम आगे बढ़ाएंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अंग्रेज भारत छोड़ कर जा रहे हैं इसकी मुझे बिल्कुल फिक्र नहीं है, लेकिन हमें संविधान में जो रियायतें चाहिए थीं उनके बारे में बिना कुछ किए ही वे जा रहे हैं। उनका यह बर्ताव सही है या नहीं इसका फैसला वे खुद ही करें। अस्पृश्यों की हितरक्षा की कुछ व्यवस्था करने की जरूरत के बारे में मैंने उन्हें सौ बार बताया था। अंग्रेज अगर यह काम नहीं भी करते तो छह करोड़ अस्पृश्यों का भाग्य उज्ज्वल होने का मुझे पूरा यकीन होने की बात भी मैंने उनसे कही थी। मजदूर सरकार हमारे न्याय अधिकार अगर हमें नहीं भी दे, 6 करोड़ की जनसंख्या वाला अस्पृश्य वर्ग किसी प्रकार के सहयोग या ताकत की परवाह किए बगैर भी मनचाहा प्राप्त कर ही लेगा, इस बारे में मेरे मन में कोई आशंका नहीं।

जागरुकता और संगठन के अभाव में हम अब तक दूसरों का वर्चस्व सहते आए, लेकिन अब वह समय लद गया। अब हममें नवशक्ति का संचार हुआ है। भारत का हर व्यक्ति यह जानता है। इसीलिए काँग्रेस और लीग अपनी-अपनी तरफ से हमारा समर्थन प्राप्त करने की कोशिश में लगे हुए हैं। इसकी एक ही वजह है- फौलादी संगठन।

अरुणः 9 जून, 1947