246 14-4-1947 देश को आजाद करने की राह में बाधाएं पैदा नहीं करना मेरी नीति है - मुंबई - Page 77

58 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

द्वारा उठाए गए कदम के लिए कोई मुझे दोषी नहीं ठहराएगा। 296 सदस्यों की संविधान समिति में मैं केवल अकेला हूं। व्यक्ति चाहे जितना बड़ा क्यों न हो, उसमें असामान्य बुद्धि, और विवाद की अतुलनीय सामर्थ्य ही क्यों न हो वह अगर अकेला हो जाए तो कुछ कर नहीं सकेगा यह बात आप सब लोग भी ध्यान में रखिए। 211 सदस्य अगर मिल कर तय करते हैं कि किसी बात की यथार्थता को बौद्धिक या वैचारिक कसौटी पर परखे बगैर ही, केवल विरोधक को मार गिराने के लिए ही विरोध करना है तब अकेला व्यक्ति क्या कर सकता है?

आखिर में बस मैं यही उम्मीद करता हूं कि सबकी सद्बुद्धि जागृत होकर उन्हें इन बातों का अहसास होगा और खुद को जो प्राप्त करना है वह प्राप्त किया जा सकेगा। इसके लिए हमें केवल संगठन की जरूरत है। अपनी लगातार कोशिश से हमें जो राजनीतिक अधिकार प्राप्त होंगे वे केवल एक निश्चित समयावधि के लिए ही होंगे यह बात भी ध्यान में रखनी होगी। हिंदुस्तान में एक समय ऐसा आएगा जब केवल हमारे ही नहीं बल्कि सभी समाजों के आरक्षित अधिकार नष्ट किए जाएंगे क्योंकि तब उनकी जरूरत समाप्त हो जाएगी। जब यह होगा तब हमें अपने संगठन, शक्ति और एकता के बल पर निर्भर करना होगा। इसीलिए अभेद संगठन निर्माण करने का निश्चय पक्का करें।

आपकी उन्नति कष्ट और परेशानियां सहने में ही है इसलिए विपत्तियां आने पर धीरज ना खोएं। उसी से आपमें दिव्य तेज पैदा होगा। यही एकमात्र संदेश मैं आपको देना चाहता हूं। कुछ गांवों में दलितों पर होने वाले अत्याचारों और अन्यायों के कारण आप अपनी हिम्मत न हारें। पूरी तरह संगठित होने के निश्चय से प्रेरित होकर नई उमंग के साथ, खुशी-खुशी और पूरे उत्साह के साथ निरंतर कार्य करने की राह पर आगे बढ़ेंगे तो इस देश के किसी भी तरह के दुख-दर्द से आपको डर नहीं लगेगा।