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अस्पृश्य मजदूर बिना किसीकी बातों में आए अपने संगठन को
मजबूत करें
मुंबई के एच. एम. आई. डॉकयार्ड के अस्पृश्य कामगारों की ओर से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को 1001 रु. की थैली अर्पण करने का समारोह एस. एस. मोकलसाहब की अध्यक्षता में मंगलवार दिनांक 27 मई, 1947 को शाम 6 बजे सिद्धार्थ कॉलेज में बडी धूमधाम से मनाया गया। इस समारोह में भाई ए. वी. चित्रे, मुंबई शहर शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन के महासचिव श्री भातनकर आदि लोग उपस्थित थे।
अस्पृश्य कामगारों के लिए किए गए कार्यां की विस्तृत जानकारी कार्यक्रम की शुरुआत में अस्पृश्य कामगार संघ के अध्यक्ष ने दी। बाद में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को थैली अर्पण की गई। जवाब देने के लिए डॉ. अम्बेडकर खडे हुए तब तालियों की गड़गड़ाहट हुई। सभा में ढाई-तीन हजार लोग उपस्थित थे।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा -
आज भाषण करने का मेरा कोई इरादा नहीं है क्योंकि आपके काम से मैं संतुष्ट नहीं हूं। लेकिन परम्परा के अनुसार मुझे आपके प्रति आभार प्रकट करने होंगे। गोदी में तीन से चार हजार अस्पृश्य कामगार होने के बावजूद सामाजिक कार्य के लिए केवल एक हजार रुपए ही इकठ्ठा हों यह बड़े आश्चर्य की बात है। मैं जब मजदूर मंत्री था तब गोदी के कामगारों को पांच-छह बार तनख्वाह में बढ़ोतरी मिली। दारू पीना, फिल्में और नाटक देखने जैसी लतों पर खर्च करने के लिए आपके पास बहुत पैसा होता है लेकिन सामाजिक कार्य में मदद देने के लिए आप ना-नुकर करते हैं। खैर!
नौकरियों में मुसलमानों के लिए 25 प्रतिशत जगहें देना 1934 में तय हुआ। उस वक्त अस्पृश्यों के लिए कोई आरक्षण नहीं था। लेकिन प्रांतीय और भारत सरकार के साथ बड़ी लड़ाई छेड़ कर मैंने अस्पृश्य वर्ग के लिए सरकारी नौकरियों में आठ पूर्णांक एक तिहाई प्रतिनिधित्व दिलाया। आगे 1942 से 1945 के आखिर तक जब मजदूर मंत्री के पद पर था तब मैंने अस्पृश्य वर्ग के लिए ढेर सारी नौकरियां उपलब्ध कराईं। अपने पद का इस्तीफा देने से एक दिन पहले ही मुझे पता चला कि भारत सरकार ने अस्पृश्यों के लिए सरकारी नौकरियों में जनसंख्या के अनुपात में बारह पूर्णांक दो तिहाई प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की है। यह सब मैंने ही लड़-झगड़ कर
गरुड़ 15 जून, 1947