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मुझे ऐसे कार्यक्षम लोग चाहिएं जिनकी क्षमता
के बारे में मुझे भरोसा हो
मंबई में 22 जून, 1947 के दिन सिद्धार्थ कॉलेज के मैदान में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की अध्यक्षता में श्री दादासाहब गायकवाड़ को थैली अर्पण की गई। उस वक्त डॉ. बाबासाहेब ने कहा,
दादासाहब गायकवाड़ को दी जा रही राशि देख कर मुझे गुस्सा आ रहा है। मुझे पहले अगर इस तुच्छ बात का पता चलता तो मैं यहां नहीं आता। यहीं अगर रुपया इकठ्ठा किया जाए तब भी एक हजार की रकम बड़ी आसानी से जुट जाएगी। 352 रुपया देना शर्म की बात है। सामाजिक समर्पण को यह शोभा नहीं देता। जो देना हो वह पूर्ण निष्ठा भाव से दीजिए। इस प्रकार जबरदस्ती कुछ करने के लिए किसने कहा आपसे? अगर किसी को कुछ देना हो तो उस व्यक्ति की हैसियत के अनुसार दो।
कोकणी पंचायत के बारे में बोलते हुए उन्होंने पंचायतों को काफी सुनाया और कहा कि, इसके बाद अगर कोई पंचायत बिना वजह रुपया अपने पास रखती है तो उस पर मैं मुकदमा दायर करूंगा। इस बुरी आदत को खत्म करने के लिए कोई कठोर कदम होना ही चाहिए।
मुझे कार्यक्षम लोग चाहिएं। उनकी क्षमता के बारे में मुझे यकीन होना चाहिए। सचिव पर जिनके आरोप हैं वे मुझे अपनी शिकायत के बारे में समझाएं और यकीन दिलाएं। मैं उस जगह पर उन्हें नियुक्त करूंगा। मुझे काम से मतलब है। इलेक्शन से नहीं। मुझे क्षमतावान लोग चाहिएं।
अपना कोंकण प्रांत शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। इसलिए मैं उसे शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने के बारे में सोच रहा हूं। मुंबई सरकार से जमीन की मांग की है। दापोली में बच्चों की शिक्षा के लिए बो²डग खोलना है। इसलिए आप उन्हें तन, मन, धन से मदद करें। इस कार्य में 20 हजार रुपये लगेंगे।
गरुड़ः 29 जून, 1947