62 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
249
दुनिया के न्यायालय के समक्ष अंग्रेजों को जवाब देना होगा
मुंबई में 7 जुलाई, 1947 के दिन भारत के महान राजनीतिज्ञ और संविधान विशेषज्ञ डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने नए आजादी बिल पर अपनी राय प्रकट करते हुए कहा, दो उपनिवेशों में भारत को विभाजित कर कुछ रियायतें बनाई जा सकती हैं लेकिन इन उपनिवेशों और रियासतों के बीच फूट के बीज बोना कतई समर्थनीय नहीं होगा। इस धूर्तता का जवाब अंग्रेजों को दुनिया के न्यायालय के सामने देना होगा।
सुधार कमीश्नर श्री मेनन ने परसों बताया कि व्यवहारिकता से वर्हाड मध्यप्रांत का ही एक हिस्सा है। श्री मेनन का मत अगर सही है तो वर्हाड की जनता को विशेष संतोष होगा। लेकिन यह मत नए बिल के दूसरी धारा की 7वीं उपधारा के अनुकूल नहीं। इस धारा के अनुसार 15 अगस्त, के दिन रियासतों का सार्वभौमिकित्व तथा अन्य सभी करार रद्द हो जाएंगे। इसलिए जिस करार के कारण वर्हाड प्रांत अंग्रेजों को मिला था वह करार भी रद्द होने वाला है। इसका मतलब, 15 अगस्त के बाद वर्हाड प्रांत फिर निजाम को मिलेगा। इस धारा में वर्हाड का साफ जिक्र नहीं है लेकिन इस धारा का रूप सामान्य होने के कारण अलग जिक्र की आवश्यकता नहीं। यह धारा वर्हाड प्रांत पर लागू न किए जाने की स्थिति में अलग जिक्र करना जरूरी होता।
वर्हाड की ही तरह अन्य संस्थानों के जो हिस्से करार के अनुसार ब्रिटिश हिस्सों में शामिल किए गए हैं वे भी इस धारा के तहत फिर रियासतों में जाएंगे। श्री मेनन द्वारा इस धारा का जो अर्थ लगाया गया है वह गलत है।
सरदार पटेल का कहना भी गलत है कि निजाम के साथ नया करार होने तक वर्हाड का जो स्थान अब है वही कायम रहेगा। प्रदेशों की अदला-बदली के संदर्भ में जो करार और चुंगी, पोस्ट, यातायात आदि के संदर्भ में किए गए करार आदि के बिलों में सुधार किए गए हैं। प्रदेशों से संबंधित करार इसके बाद निरस्त हो जाएंगे।
मेरा अर्थ अगर गलत हो तो मुझे सचमुच खुशी होगी। लेकिन कॉमन्स में एटली जब इस पर चर्चा करेंगे तब उनसे सवाल पूछ कर इस धारा के बारे में स्पष्ट करना भारत और वर्हाडी जनता के हित में रहेगा।
गरुड़ः 13 जुलाई, 1947