251 10-10-1947 अल्पसंख्यकों को मनाना ही चाहिए, अधिकार के नाम पर उन पर अत्याचार न करें - मुंबई - Page 90

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अपनाने से हमें बचना होगा। ऐसे कई उपाय होंगे और उन्हें लागू करते समय समाज को उपयुक्त सावधानी बरतनी होगी। समाज की बुनियाद मजबूत होनी चाहिए और उसका लक्ष्य विशाल। समाज की नजर संकीर्ण न हो और किसी एक सिद्धांत को श्रेष्ठ न माना जाए। समाज की उन्नति के कई उपाय हो सकते हैं और विभिन्न लोग अगर अलग-अलग उपायों में विश्वास करते हों तो स्पष्ट है कि देश में विभिन्न पक्ष होगे ही। मेरी राय में राजनीति में ईमानदारी का होना जरूरी है। जब ईमानदार लोग राजनीति में होगे तब ही प्रजातंत्र का सही-सही विकास होगा। मैं जानता हूं कि कई लोगों की राय में राजनीतिक पुरुष बेईमान होते हैं। इसके क्या मायने होते हैं? जिन्हें एक तरह का दर्शन ही समाज के उद्धार का उपाय है ऐसा लगता है वे उन लोगों से अलग ही रहें जिनका उस दर्शन के देश के उद्धारक होने में विश्वास नहीं होता। सुलह से बनी शासनप्रणाली कारगर नहीं होती। और यह बात सही है यह मैं आपको बेहिचक बताता हूं। क्योंकि शासन का मतलब ही निर्णय लेना होता है और जब तक समाज सत्तावादी (जिन्हें एक मन के और निश्चय के कहते हैं ऐसे लोग कि जिनका जीवन दर्शन एक ही है) राज्य की सत्ता में नहीं आते तब तक ऐसी राज्य व्यवस्था में आप, आपकी राय सही निर्णय नहीं ले सकते और न आप काम को जल्दी निपटा सकते हैं। पूंजीपति और समाज सत्तावादियों के मिले-जुले मंत्रिमंडल में किसी विषय पर अगर निर्णय लेना हो तो उन्हें अपने मतभेदों को पहले समाप्त करना होगा और दूसरे पक्षों से अनुमति लेने के लिए अपने सिद्धांतों की बलि चढ़ानी होगी। इस प्रकार लिए गए निर्णय भी जाहिर है कि न इधर के होंगे न उधर के। यानी, सही नहीं होंगे। इसीलिए, इस कॉलेज में पार्लियामेंटरी प्रजातंत्र की शुरुआत करने से पहले आपको एक-दूसरे के बारे में निश्चित ज्ञान, सही जानकारी और विचारों का पता चलना जरूरी है।

अब इस लड़ाई में किस की विजय होगी यह देखने के लिए समर स्थल पर उपस्थित रहने की कोशिश करते हैं। काँग्रेस और समाजवादी दोनों के लिए हमारे मन में एक-सी आत्मीयता है। अब देखते हैं कि कहां तक अंग्रेजी और समाजवादी लोग इस कसौटी पर

खरे उतरते हैं। इस देश पर आने वाले मुश्किल के समय में आप देश की मदद करने के लिए सक्षम बनें यही हमारा उद्देश्य है।