252 14-1-1948 राजनीति की लगाम शिक्षा के बगैर हाथ नहीं आने वाली - मुंबई - Page 92

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लोगों में यह कला हो सकता है पैदाइशी हो। महाराष्ट्र में नामदार गोवले निष्णात वक्ता थे इस बारे में दो राय नहीं हो सकती। कोल्हापुर के राजाराम कॉलेज में नामदार गोवले प्रोफेसर के पद पर कार्य कर रहे थे। इस दौरान किसी वक्ता का वहां भाषण हुआ। मेहमानों के प्रति आभार प्रकट करने का काम आयु. गोखले को दिया गया था। आयु. गोवले अपना भाषण लिख कर लाए थे। इतना ही नहीं भाषण उन्होंने याद भी कर लिया था, लेकिन वे जब बोल रहे थे तब किसी ने कुछ इशारा किया और वे अपना भाषण भूल गए। 1-2 मिनटों में ही वे सभागार से बाहर निकल गए।

इस घटना ने उन्हें अच्छा सबक सिखाया। मेकॉले नामक एक लेखक की सारी किताबें याद करने की उन्होंने ठान ली। मेकॉले का पूरा साहित्य उन्होंने याद कर लिया। उनके कमरे में हर तरफ आईने लगे हुए थे। भाषण करते हुए वे अपने आपको आईने में देखा करते। भाषण करते हुए अपने हाथ, अपने बाल, अपनी मुद्राएं वे आईने में देखा करते।

आजकल मिस्टर चर्चिल को हाऊस ऑफ कॉमन्स में अंग्रेजी भाषा पर प्रभुत्व रखने वाला वक्ता माना जाता है। हाऊस ऑफ कॉमन्स में जाने से पहले वह भी अपना भाषण लिख कर तैयार रखते हैं। वह तात्कालिक पर बोलने वाले वक्ता नहीं हैं। श्रोताओं से आश्चर्योद्ग निकलें, अपने को कुशाग्रों में अग्रणी माना जाए इसलिए महत्वपूर्ण लोकोक्तियां वह अपने शर्ट के स्टिक कफ पर लिख कर ले जाते हैं। किसी के विरोध करने के बाद ही उनके भाषण में रंग चढ़ता है। मिस विकिलसन यह जानती थीं। तब लेबर पार्टी ने तय किया कि उनके भाषण का विरोध नहीं करेंगे ताकि उनके भाषणों की रंगत ही न बढ़े। इससे चर्चिल के भाषण एकदम असरहीन होने लगे।

इसलिए, आप लोगों को भी निराश होने की जरूरत नहीं है। प्रजातंत्र के युग में बेहतरीन भाषणकला की बहुत जरूरत है। जो बोलने की कला के सहारे दुश्मन का मन जीत लेता है वह महापुरुष होता है।

इस कला को आत्मसात करने के लिए बहुत मेहनत करनी चाहिए। मैं खुद भी पहले डरपोक था। एलफिन्स्टन कॉलेज में मैं जब प्रोफेसर था तब छात्रों के सामने भाषण देते समय शुरू-शुरू में मेरा मन भी डांवाडोल हुआ करता था। उच्चवर्णियों के आगे महार का बच्चा बोला तो उसका मजाक उड़ाया जाएगा ऐसा डर मुझे लगता था। बहस-मुबाहिसों में मैंने ज्यादातर हिस्सा नहीं लिया। उस वक्त मुझे लगता नहीं था कि मैं अच्छा बोल पाऊंगा। अंग्रेजी भाषा मैं अच्छी तरह लिख सकता हूं। कम से कम मुझे उस वक्त ऐसा लगता था। लेकिन कड़ी मेहनत और लगन को अपनाकर मैंने यह कला विकसित की है।

इस मामले में मैंने महती प्रयत्न किए हैं। 13-13 बार मैंने अपने भाषण लिखे हैं।