252 14-1-1948 राजनीति की लगाम शिक्षा के बगैर हाथ नहीं आने वाली - मुंबई - Page 93

74 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इससे बेहतर कोई भी कुछ अधिक बता नहीं पाएगा इस बारे में यकीन होने के बाद ही मैं अपना भाषण दिया करता था।

आज मैं जो कुछ थोड़ा-बहुत बोल लेता हूं वह सब मेरे पूर्वपरिश्रम का ही फल है ऐसा कहना पड़ेगा।

आज छात्रों के जो भाषण हुए उनमें मैं वाकपटुता नहीं तलाशता। मैं किसी और नजरिए से इनकी ओर देख रहा था। बताने लायक बात यह कि, सबकी भावनाओं में मुझे एक ही स्वर सुनाई दिया। 20 सालों तक किसानों की तरह मैंने खेती की, हल चलाया, कंकड़-पत्थर हटाए। आज उस जमीन में अंकुर उगा है यह देख कर मुझे बहुत खुशी हो रही है। अनगिनत लोगों के सामने मैंने भाषण दिया है, बहुत सारे लोग मेरा भाषण सुनने के लिए आते रहे हैं। उस वक्त कभी मुझे लगता कि मैं कहीं किसी बाबा की तरह का काम तो नहीं कर रहा हूं? आज युवाओं में जो जागरूकता देख रहा हूं तो लगता है कि वे समाज में कुछ स्थान हासिल करना चाहते हैं, सम्मान के साथ जीना चाहते हैं। अपने पुरखों की तरह कलंकित जीवन वे नहीं बिताना चाहते। सभी के भाषणों में मुझे यही स्वर सुनाई दिया।

शिक्षा और विद्या के बिना अपना उद्धार संभव नहीं। अपने जीवन में मैंने कई तरह के काम किए। राजनीति में मेरे जीवन का महत्वपूर्ण समय बीता। अभी राजनीति की लगाम उच्चवर्णियों के हाथ में है। लगाम को अपने ही पास रखने के लिए उच्चवर्णियों की कोशिश जी-जान से चल रही हैं। श्रेष्ठ दर्जे की मौके की जगहें हासिल करने के लिए जो शिक्षा चाहिए वह उच्चवर्णियों के अलावा अन्य किसी को अभी प्राप्त नहीं हुई हैं। कहा जाता है कि जिसके हाथ में पालने (झूले) की डोर होती है वही दुनिया का उद्धार कर सकता है। इसी प्रकार राजनीति की लगाम विद्या के बगैर अपने हाथ नहीं आने वाली। सत्ता को अपने कब्जे में करने के लिए कई लोगों की कोशिश जारी हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पा रही। इस फर्क की जड़ यही है। इंजीनियर, कलक्टर आदि पद उच्चवर्णियों को केवल इसलिए मिलते हैं क्योंकि उनके पास विद्या है। सौ में से करीब-करीब 99 इंजीनियर, 99 कलक्टर उच्चवर्ण के होते हैं। सो, अपने मातहत की जगहे वे अपने ही लोगों को देते रहते हैं।

केवल क्लर्क बनने के लिए इस नाइट स्कूल का आपको लाभ नहीं मिलेगा बल्कि मौके की जगहें पाने के लिए भी आप काबिल बनेंगे। रात्रि के स्कूल की कोशिशें प्रशंसनीय हैं। इस स्कूल की मैं जितनी हो सके हर तरह से मदद करूंगा। नाइट स्कूल को सालाना 1000 रुपयों की ग्रांट देने का मैंने निश्चय किया है। साथ ही पाठ्यपुस्तकों के लिए जो 200-300 रुपयों की जरूरत पड़ेगी वह भी मैं दूंगा। अर्थात् जो-जो देना मेरे लिए संभव है वह सब कुछ दूंगा। आप सबको इस बात का लाभ उठाना होगा।