252 14-1-1948 राजनीति की लगाम शिक्षा के बगैर हाथ नहीं आने वाली - मुंबई - Page 94

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और एक बात, आप लोगों को साफ-सुथरा रहना होगा। यहां कुछ छात्रों को मैंने साफ-सुथरे कपड़े पहने हुए देखा। किसी मैगजीन के एक अंक में ‘महार और उनके जगमगाते कपड़े’ शीर्षक से एक लेख छपा है। असल में वह वस्तु-स्थिति नहीं बल्कि केवल प्रशंसा है। कहावत मशहूर है, एक नूर आदमी, दस नूर कपड़ा बाहर निकलते समय आपके कपड़े बिल्कुल साफ होने चाहिएं। आपका पहनावा देख कर ही लोगों के मन में पहले आपके बारे में आदर उत्पन्न होना चाहिए।

मेरा काफी पैसा कपड़ों पर ही खर्च होता है। शर्ट, पैंट कॉलर्स मेरे पास कितने हैं इसका खुद मुझे भी अंदाजा नहीं है। यह बात सच है कि मेरे पास दर्जनों कपड़े हैं। कई बार उन सबसे इतना ऊब जाता हूं कि लगता है सबकी नीलामी कर दूं।

जिस प्रकार आपको साफ-सुथरा रहना होगा उसी प्रकार आपको स्वाभिमान के साथ भी रहना होगा। ‘पाटील, मैं आपके जूतेबराबर हूं’ वाली सोच छोड़ देनी चाहिए। किसी से अपमान सहने के बजाय मैं मर जाना पसंद करूंगा - ऐसी आपकी सोच होनी चाहिए।

आपको खूब पढ़ना चाहिए। हर रोज एकाध किताब पढ़ने की आदत आपको डालनी चाहिए। इससे आपका ज्ञान भी बढ़ेगा और आपमें आत्मविश्वास पैदा होगा। अपनी नई इमारत खड़ी हो जाने पर 1000-2000 छात्रों का प्रबंध किया जा सकता है। दिन भर काम कर रात 8 से 10 बजे तक आप पढ़ाई करते हैं यह निश्चित ही प्रशंसनीय है। आप सबको सफलता मिले यही कामना मैं करता हूं।