253 18-4-1948 धार्मिक कानून के खिलाफ धर्मनिरपेक्ष कानून की लड़ाई में धार्मिक कानून का पलड़ा भारी हो तो देश का विनाश अटल है - नई दिल्ली - Page 95

76 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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धार्मिक कानून के खिलाफ धर्मनिरपेक्ष कानून की लड़ाई में धार्मिक

कानून का पलड़ा भारी हो तो देश का विनाश अटल है

नई दिल्ली में लॉ युनियन के सालाना समारोह के अवसर पर ‘हिंदू संस्कृति के पतन के कारण’ विषय पर भाषण देते वक्त डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा -

प्राचीन हिंदू समाज में ‘भगवान ने कानून बनाया है’ जैसी कई गलत धारणाएं प्रचलित थीं। इसी कारण किसी जमाने में जो हमारा राष्ट्र विकास के शिखर पर था वह प्रगतिशील नहीं रह पाया। धार्मिक कानून के खिलाफ धर्मनिरपेक्ष कानून की लडाई यहां भी हुई। दुर्भाग्य से यहां धार्मिक कानून की जीत हुई जो देश के पतन की एक प्रमुख वजह बनी।

हमारे प्राचीन समाज ने सामाजिक धारणा के इस दोष को दूर करने में आनाकानी की और आज यही उसके विनाश की वजह बनी है। मनु जैसे विषमतावादी विचारकों द्वारा जो प्रतिबंध तैयार किए गए थे उन्हीं से चिपके रहने की भारतीय समाज की मानसिकता रही। समाज की कमियों को सुधारना कानून का लक्ष्य होता है।

हमारे देश में संस्कृति में सुधार लाने का कार्य लगातार कभी हुआ नहीं। किसी जमाने में कुछ समाज और राष्ट्रों का इसीलिए विनाश हुआ क्योंकि वे प्रगतिशील नहीं बन पाए। भारत के इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो यह बात सहज ही ध्यान में आएगी।

आम आदमी सोचता है कि आज की विधानसभा की रचना और कार्यपद्धति को हमने इंग्लैंड से लिया हुआ है। लेकिन अगर कोई हमारे प्राचीन ग्रंथ ‘विनय पिटीका’ पढ़े तो उसका यह भ्रम दूर हो जाएगा। विनय पिटीका के अध्ययनकर्ताओं को विधानसभा से संबंधित कुछ नियम पता थे। कइयों को लगता है कि प्रस्ताव न रखने से विधानसभा में उस विषय पर बहस नहीं होगी और वोट भी नहीं पड़ेंगे यह नई बात है, लेकिन यह एक सर्वमान्य गलतफहमी है।

लगभग सभी यह मानते हैं कि गुप्त मतदान की पद्धति हमने अंग्रेजों से ली है। यह भी गलत धारणा है। ‘विनय पिटीका’ में गुप्त मतदान की खास व्यवस्था का वर्णन है। इस पद्धति को उसमें ‘सालपत्रकगृहे’ कहा जाता था। इसमें पेड़ की छाल का मतपत्रिका के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। मुझे मानना होगा कि किन्हीं वजहों से हमने अपना

गरुड़ः 18 अप्रैल, 1948, भाषण की तारीख नहीं दी गई है।