78 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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मैं पत्थर की तरह मजबूत हूं, पिघलने का डर मुझे नहीं, आपका
हाल अलग है, आप ढेले की तरह बिखर जाओगे!
संयुक्त प्रांत शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन का 5वां अधिवेशन 24-25 अप्रैल को लखनऊ में आयोजित किया गया।
पिछले वर्ष इसी जगह शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन की ओर से राजनीतिक अधिकार पर मुहर लगाने के लिए और मनुष्यो की समानता के तथ्य को सार्वजनिक करने के लिए सत्याग्रह किया गया। 2000 से अधिक दलित महिला और पुरुषों ने इस सत्याग्रह में हिस्सा लिया था। लखनऊ में उन सबको गिरफतार कर कारागार में रखा गया था। संयुक्त प्रांत की अस्पृश्य जनता का यह बहुत बड़ा त्याग था। सत्याग्रह से मुक्त हुए महिला और पुरुषों की अब तक केवल एकमात्र भावनापूर्ण इच्छा थी कि दलितों को मुक्ति का मार्ग दिखाने वाले निर्भय नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के दर्शन हों और जीवन को पवित्र करने वाला उनका उपदेश सुनने का पुण्य मिले। उनकी इस इच्छा और कोशिश के फलस्वरूप लखनऊ में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण हो रहा था। उनका यह भाषण निःसंदेह अस्पृश्यों के आंदोलन में मील का पत्थर है।
आयु. गयाप्रसाद, ज से संयुक्त प्रांत शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन की कोशिश से तथा बाल गोविंद, कन्हैयालाल सोनकर, चौधरी बुद्धदेव और मेवालाल सोनकर के सहयोग से अधिवेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अधिवेशन में 10,0000 से अधिक दलित समुदाय उपस्थित था। ऑल इंडिया शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन के ज से राजभोज भी उपस्थित थे। आयु. गोपीचंद विप्पल (प्रेसिडेंट, संयुक्त प्रांत समता सैनिक दल), आयु. तिलकचंद कुरील (प्रेसिडेंट संयुक्त प्रांत शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन) वहां के मुख्य संगठनकर्ता और आधार स्तंभ हैं।
इस अधिवेशन को विशिष्ट कहने की दो वजहें हैं। पहली वजह यह कि इस अधिवेशन के जरिए दुनिया के सामने यह बात आ गई है कि काँग्रेस सरकार में अभी भी अस्पृश्यों के साथ ढाए जा रहे जुल्मों पर रोक नहीं लगी है और कांग्रेस अस्पृश्यों के प्रति गदगद प्रेम का ढिंढोरा पीट कर मूर्ख बना रही है। दूसरी वजह यह कि देश को प्रगति कारक नीति की ओर ले जाते वक्त अत्यंत हीन स्थिति में रह रहे अस्पृश्य समाज की उन्नति के लिए जो बातें करनी आवश्यक हैं वे करने से दलित फेडरेशन कभी
जनताः 1 मई, 1948