254 25-4-1948 मैं पत्थर की तरह मजबूत हूं, पिघलने वाला नहीं, आपका हाल अलग है, आप ढेले की तरह बिखर जाओगे - लखनऊ - Page 98

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चूकेगा नहीं, यह साबित हो चुका है।

रविवार दिनांक 25 अप्रैल, 1948 के दिन इस अधिवेशन में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण हुआ । उन्होंने अपने भाषण में कहा -

भाइयों और बहनों,

काँग्रेस में शामिल होने से अपना कुछ हित साध्य होगा ऐसा मुझे नहीं लगता। दिनों-दिन काँग्रेस कमजोर हो रही है। समाजवादी उससे अलग हुए, इसलिए वह अधिक दुर्बल हुई है। ऐसे समय इन दोनों पार्टियों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा का फायदा उठा कर अपनी पार्टी का अलग अस्तित्व बनाए रखते हुए जो पार्टी हमारी शर्तें मानेगी उनके साथ सहयोग कर हम सत्ता हासिल कर सकते हैं। सत्ता सामाजिक प्रगति का अचूक नुस्ख है।

काँग्रेस में जाकर पिछड़ी जातियों का सत्ता हासिल करना असंभव है। वह एक बहुत बड़ी संस्था है। हमारा उसमें प्रवेश करना महासागर में बूंद डालने जैसा होगा। उस संस्था में शामिल होकर हमारी उन्नति नहीं होगी। काँग्रेस अगर अलग-अलग गुटों में विभाजित हुई तो हम अपने उद्धार की उम्मीद कर सकते हैं। काँग्रेस में हम अगर प्रवेश करें तो हमारे दुश्मनों की ताकत बढ़ेगी। आज काँग्रेस की हालत आग लगे घर की जैसे हुई है। उसमें प्रवेश कर हम जल कर भस्म हो जाएंगे। अगले दो सालों में काँग्रेस का विनाश हुआ तो उसमें मुझे बिल्कुल आश्चर्य नहीं होगा।

आज समाजवादियों ने काँग्रेस से विदा ली है। इस कारण निश्चित रूप से काँग्रेस की ताकत कम होने वाली है। ऐसे वक्त हमें अपनी ताकत अलग संगठन खड़ा कर तीसरे मोर्चे के रूप में खड़े होने में खर्च करनी होगी। काँग्रेस अथवा समाजवादी में से किसी एक पार्टी को अगर बहुमत नहीं मिला तो वे हमारे वोटों की भीख मांगने आएंगे। ऐसे समय अपना समर्थन देने के लिए हम अपनी शर्तें रख कर सत्ता में संतुलन बना सकते हैं।

करीब 12 साल पूर्व लोथियन समिति के सदस्य के तौर पर हम लखनऊ आए थे। यहां के अस्पृश्यों में उस वक्त से राजनीतिक जागरुकता अधिक हुई है यह देख कर मुझे खुशी होती है।

पिछले साल संयक्त प्रांत में अस्पृश्यों द्वारा किए गए सत्याग्रह आंदोलन का मैं गर्व के साथ जिक्र करता हूं। उस आंदोलन में हिस्सा लेकर जिन्होंने तकलीफ और पीड़ा सही उन सबका मैं अभिनंदन करता हूं। एक बात आपके ध्यान में आई होगी कि किसी बात को साधने का निश्चय हम जब करते हैं और उसके लिए सभी कोशिशें करने पर उतारू हो जाते हैं तब राह में कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं हम अपने लक्ष्य की प्राप्ति सहजता के साथ कर सकते हैं।

मेरे काँग्रेस सरकार में शामिल होने से मेरे कई अनुयायी थोड़े बौखला गए हैं।