5. उप-समिति संख्या 6 (मताधिकार) - Page 101

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हमने वयस्क मताधिकार को इसलिए माना है कि हम उसे एक आदर्श समझते हैं, हम रिपोर्ट का वह भाग स्वीकार कर चुके हैं। मैंने इन शब्दों का सुझाव दिया है, फ्कम से कम बड़े समुदायों को यथासंभव आनुपातिक संख्या में मत प्रदान करेगीय्।

सबसे पहले तो मैं समिति से कहूंगा कि ये शब्द ज्यों के त्यों रहे, ‘यदि संभव हुआ तो प्रत्येक समुदाय को देगी’। इसका कौन विरोधी है?

इस बात को नोट किया जाएगा कि माननीय कावसजी जहांगीर, कर्नल गिडने और सरदार उज्ज्वल सिंह बाद वाले भाग से असहमत हैं।

डॉ. अम्बेडकरः यदि आप इसे मताधिकार समिति के समक्ष रखना चाहते हैं, तो हम अब भी यही कहना चाहेंगे कि हमारी दृष्टि में वयस्क अधिकार का सिद्धांत दलित वर्गों पर लागू किया जाए।

अध्यक्षः वह तो हमारे पास पहले से ही है।

श्री फुटः अन्यथा आप प्रत्येक पैराग्राफ में एक पूरक वाक्यांश जोड़ देंगे।

अध्यक्षः यह हम हर बार नहीं कर सकते।

श्री जाधवः ब्राह्मण और गैर-ब्राह्मण तथा बंबई के विभिन्न समुदाय, दलित वर्ग और शेष सभी को शामिल किया जाए।

अध्यक्षः हम इस पर विचार नहीं कर सकते।

(डॉ. अम्बेडकर का आग्रह था कि पैरा 13 से उनकी असहमति को अभिलिखित किया जाए।)

* * * *

श्री फुटऽः मुझे केवल एक ही बात कहनी है। वयस्क मताधिकार की मांग पर आधारित सामान्य आपत्ति को देखते हुए, क्या आपको प्रत्येक पैरा को नोट करना आवश्यक है? क्या अंत में कोई सामान्य टिप्पणी नहीं होगी, जिसमें श्री जोशी और उनके सहयोगियों की आपत्ति का उल्लेख होगा?

अध्यक्षः मेरे ख्याल में आपके लिए वही बेहतर होगा। मैं आपका दृष्टिकोण भली प्रकार समझता हूं।

डॉ. अम्बेडकरः मैं यह आप पर छोड़ता हूं।

अध्यक्षः यदि मुझे यह कहने दिया जाए, तो मैं समझता हूं कि यदि उदाहरण के लिए आपके कथन से यह आभास हो कि आपको महिलाओं के मत पर आपत्ति है, तो आपकी बात गिर जाएगी।

डॉ. अम्बेडकरः हमारे पास उसके लिए बहुत ठोस कारण हैं। हम मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार हैं और उस आधार पर जो भी आपत्ति उठाई जाएगी, हम उससे निपट सकते हैं। सैद्धांतिक रूप में हमें महिलाओं के बारे में कोई आपत्ति नहीं है।

ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि सब-कमेटी नं. 6 (फ्रेन्चाइज), पृ. 175-76