5. उप-समिति संख्या 6 (मताधिकार) - Page 102

उप-समिति संख्या 6

85

श्री जाधवः 25 प्रतिशत का अधिकतम तो महिलाओं को मिल जाएगा और उसके बाद मताधिकार को और घटाने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

पूर्ण सम्मेलन की समिति

उप-समिति संख्या 6 द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट का सारऽ

(मताधिकार - 16 जनवरी, 1931)

(डॉ. अम्बेडकर के प्रस्तावों से संबंधित कुछ पैराग्राफ)

उप-समिति ने निम्नलिखित पैरा के अनुसार सिफारिश कीः

पैरा 4. (1) कि एक विशेषज्ञ मताधिकार आयोग की नियुक्ति की जाए, जिसे ये निर्देश दिए जाएं कि वह निर्वाचक-मंडलों में तत्काल वृद्धि की व्यवस्था करे, ताकि वह कुल जनसंख्या कम से कम दस प्रतिशत को, बल्कि इससे अधिक लेकिन कुल जनसंख्या के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं - को मताधिकार दिलाए बशर्ते कि पूरी जांच-पड़ताल के बाद ऐसा करना व्यवहार्य और वांछनीय हो।

(2) कि इस वृद्धि की व्यवस्था के साथ-साथ आयोग को ऐसी योजना शुरू करने की संभावना पर विचार करना चाहिए, जिससे उन सभी वयस्कों को, जो प्रत्यक्ष मत के पात्र नहीं हैं, 20-20 के प्राथमिक वर्गों में या किसी अन्य उपयुक्त ढंग से वर्गीकृत किया जाए, ताकि प्रत्येक वर्ग से एक प्रतिनिधि सदस्य का चुनाव किया जा सके, जो प्रांतीय चुनावों में प्रत्यक्ष अर्ह मतदाताओं के रूप में उन्हीं निर्वाचन-क्षेत्रों अथवा उनके लिए बनाए गए पृथक निर्वाचन-क्षेत्रों में मत देने के पात्र होंगे।

(श्री जोशी, श्री शिवा राव, डॉ. अम्बेडकर, श्री श्रीनिवासन, श्री के.टी. पॉल और श्री जाधव इन प्रस्तावों को सर्वथा अपर्याप्त मानते हैं और उनका मत है कि वयस्क मताधिकार तत्काल शुरू किया जाना व्यवहार्य भी है और वांछनीय भी।)

पैरा 7. उप-समिति की यह राय थी कि मताधिकार आयोग को मतदान के लिए अतिरिक्त अर्हता के रूप में उपयुक्त शैक्षिक अर्हता तैयार करने की संभावना पर विचार करना चाहिए।

पैरा 8. उप-समिति ने इस पर सहमति व्यक्त की कि वर्तमान सैनिक सेवा की अर्हता कायम रखी जाए और यह सिफारिश की कि मताधिकार आयोग को इस अर्हता के विस्तार पर विचार करना चाहिए ताकि सहायक तथा प्रादेशिक बलों में सेवा को शामिल किया जा सके।

पैरा 9. उप-समिति इस बात से सहमत हुई कि महिलाओं के लिए विशेष अर्हताएं

ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि सब-कमेटी नं. 6 (फ्रेन्चाइज), पृ. 178-79