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उप-समिति संख्या 8 (सेवाएं)

दूसरी बैठक - 7 जनवरी, 1931

डॉ. अम्बेडकरऽः जिस एक बात पर मैं समझता हूं कि इस उप-समिति को विचार करना है, वह यह है कि क्या भारतीयकरण की इस प्रक्रिया में भावी लोक सेवा में वेतन, पेंशन और अन्य सुविधाओं को लेकर भारतीयों और यूरोपियों में किसी प्रकार का विभेद रखा जाएगा। मेरे विचार से इस मुद्दे पर इस उप-समिति को अवश्य विचार करना चाहिए। इसलिए मैं इस पैराग्राफ में यह जोड़ देना चाहता हूं ‘क्या वेतन, पेंशन और अन्य सुविधाओं के मामले में भारतीय मूल और यूरोपीय मूल में समानता होगी’।

अध्यक्षः हम इसका ध्यान रखेंगे।

इसके पश्चात् ‘(4) संविधान के अंतर्गत अखिल भारतीय सेवाओं में भर्ती के लिए भर्ती प्राधिकारी कौन होगा?’

माननीय सी. सीतलवाडः इसमें आपको नियंत्रण का प्रश्न भी जोड़ना होगा, कौन भर्ती करेगा और कौन नियंत्रण रखेगा।

अध्यक्षः इसे हम फिलहाल छोड़ देते हैं।

इसके बाद ‘(5) भारतीय चिकित्सा सेवा की सिविल शाखा के संबंध में सिफारिशें’। ये तो बहुत बड़ी सूची है। इनमें से हमें जो सिफारिशें करनी हैं, वे हम कर सकते हैं।

फिर ‘(6) सिफारिश करने की वांछनीयता के इस प्रश्न को कि सही ढंग के भावी रंगरूटों को आकृष्ट करने और सेवा में बनाए रखने के लिए किस प्रकार की शर्तें आवश्यक होंगी, तकनीकी समिति या समितियों को विचारार्थ भेज दिया जाए’। मुझे लगा कि इस प्रकार के अनेक मुद्दे हैं, उदाहरण के लिए वेतन दरों के संबंध में, जिन पर हमें विचार करना है। आप आवश्यकता से अधिक देना नहीं चाहते, दूसरी ओर आर्थिक दृष्टि से खराब है कि जब आपको सही आदमी न मिल पाए तो लोगों को अपर्याप्त वेतन दें। यह स्पष्ट हैं।

ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि सब-कमेटी नं. 8 (सर्विसेज), पृ. 44-46

(इस समिति के विचारार्थ विषय था, ‘नई राजनीतिक संरचना के साथ सेवाओं का संबंध’ जिसका आशय

था - अखिल भारतीय सेवाओं में ब्रिटिश भर्ती के अनुपात को शामिल करना।)