उप-समिति संख्या 8
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नियंत्रण के प्रश्न पर, जो बात कही गई उसमें मुझे लगता है कि बहुत ही तकनीकी मामले शामिल हैं, जिसके लिए विशिष्ट ज्ञान का होना जरूरी है और इसलिए मुझे संदेह है कि यह उप-समिति कोई अंतिम राय व्यक्त करने के लिए सक्षम भी है या नहीं - मैं अपने बारे में कह सकता हूं कि मैं तो नहीं ही हूं, इसलिए मैंने जान-बूझकर कार्य-सूची की मद (6) का प्रारूप तैयार किया, जिससे हम यह विचार कर सकें कि क्या हम यह नहीं कह सकते कि अच्छे प्रकार के लोगों को आकृष्ट करने के लिए वेतन-दर क्या होनी चाहिए? क्या कोई सज्जन यह कहने के लिए तैयार है कि वह जानता है? या कोई सज्जन यह प्रतिपादित कर सकता है कि यदि हमें इस मामले से निपटना पड़े, तो नियंत्रण के संबंध में कौन से नियम बनाए जाने चाहिएं?
माननीय सी. सीतलवाडः मेरा विचार है कि नियंत्रण के संबंध में जो भी स्थूल सिद्धांत हो, उस पर यही चर्चा कर ली जाए, जैसे कि क्या वह मंत्री के पास रहे, जैसा कि इस समय है या भारत सरकार को सौंप दिया जाए।
डॉ. अम्बेडकरः यूरोपियों और भारतीयों के पारिश्रमिक में अंतर भी एक व्यापक प्रश्न है जिस पर इस उप-समिति को निर्णय करना चाहिए। इस विशेष सिद्धांत पर भी कि क्या सेवा में जो दो मूल तत्त्व हैं, उनके साथ बराबरी का व्यवहार किया जाए, निश्चय ही इस उप-समिति को इस बारे में भी निर्णय करना है।
माननीय पी.सी. मित्तरः यदि आप अखिल भारतीय सेवा रखना चाहते हैं, तो यह याद रखना आवश्यक है कि प्रांतों में परिस्थितियां वैसी नहीं हैं। जब तक आप प्रमाण नहीं ले लेते, मैं नहीं समझता कि भारत भर में सेवाओं के लिए श्रेष्ठ व्यक्ति आकृष्ट करने के प्रश्न पर व्यापक आम राय भी कैसे बन सकती है।
माननीय ए.पी. पात्रेः हमारी एक समिति थी, जिसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि सेवाओं में छंटनी की कोई व्यवस्था होनी चाहिए या नहीं। यह एक अतिस्वतंत्र समिति थी, लेकिन जिस परिणाम पर वह पहुंची वह यह था कि वेतन की दरों को वास्तव में कुछ हद तक बढ़ा देना चाहिए। मैं समझता हूं कि इस प्रश्न पर किसी स्वतंत्र समिति को विचार करना चाहिए। हममें से कुछ, जो यद्यपि भारतीयकरण के प्रबल समर्थक हैं, यह महसूस करते हैं कि हमारे अपने देश के हित में भारतीय अधिकारियों के वेतन में कुछ मितव्ययिता बरती जानी चाहिए। लेकिन इसके साथ ही ऐसे अधिकारियों के लिए पर्याप्त आकर्षण भी होना चाहिए, ताकि वे देश में अपनी स्थिति और प्रतिष्ठा को बनाए रखने में समर्थ हो सकें और स्वयं को प्रलोभन से बचा सकें। यह प्रश्न कि अच्छे लोगों को सेवा में रखने के लिए कौन सा वेतनमान पर्याप्त होगा, ऐसा मामला नहीं है, जिसका तत्काल निश्चय किया जा सके। इस पर तो बहुत सावधानीपूर्वक विचार करना होगा। यह बहुत महत्त्वपूर्ण प्रश्न है, जिसका सेवा की दक्षता पर बहुत प्रभाव पड़ता है। मेरा सादर निवेदन यह है कि हमें फिलहाल ब्यौरों के भार से बचना चाहिए।
माननीय सी. सीतलवाडः मेरे विचार में नियन्त्रण संबंधी प्रश्न पर मेरी टिप्पणी को