उप-समिति संख्या 8
99
तो सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हमने जिस उचित प्रतिनिधित्व के लोक सेवा आयोग द्वारा दिए जाने का प्रावधान किया है, वह वास्तव में दे दिया गया है।
श्री जफरुल्ला खांः गवर्नर उसको सुनिश्चित कैसे करेगा?
अध्यक्षः मेजर स्टैनले ने जो सुझाव दिया है, वह मध्य मार्ग सिद्ध हो सकता है। उनका सुझाव है कि खंड 2 के अंत में यह शामिल किया जाना चाहिए - प्रांतीय लोक सेवा आयोगों के संदर्भ में लोक सेवा आयोगों के कर्तव्य के इस भाग की गवर्नर द्वारा सांविधिक समीक्षा की जाएगी और केंद्रीय लोक सेवा आयोग के संदर्भ में यही समीक्ष्ज्ञा गवर्नर-जनरल द्वारा की जाएगी, जिन्हें वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए आवश्यक अनुदेश जारी करने की शक्ति प्रदान की जाएगी।
डॉ. अम्बेडकरः जी हां।
माननीय सी. सीतलवाडः ठीक है मैं इसे स्वीकार करने के लिए तैयार हूं।
* * * *
श्री शिवा रावऽः मेरा सुझाव है कि हम यह कहेंगे कि लोक सेवा आयोगों का प्रत्येक सदस्य अपने सद्व्यवहार पर्यंत ही पद धारण करेगा ओर यह कि लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों को तभी पदच्युत किय जा सकता है, जब केंद्रीय विधान-मंडल द्वारा गवर्नर जनरल को पत्र लिखकर और प्रांतीय लोक सेवा आयोग के मामले में संबंधित प्रांत की प्रांतीय विधान सभा गवर्नर को पत्र लिखकर इसकी मांग करे।
अध्यक्षः श्री शिवा राव ने एक नए खंड का सुझाव दिया है और उन्होंने अपनी बात बहुत स्पष्ट रूप से पेश की है। हम अपने आपको भाषा के साथ बांध देना नहीं चाहते, लेकिन इसका सार यह है कि हमें एक नया खंड रखना चाहिए कि पद पर आसीन सद्व्यवहार के दौरान ही रहा जा सकता है ओर यह कि लोक सेवा आयोगों को कोई भी सदस्य चाहे वह अध्यक्ष हो या साधारण सदस्य राज्य विधान-मंडल द्वारा गवर्नर या गवर्नर जनरल को, जो भी स्थिति हो, पत्र लिखकर पद से हटवाया जा सकता है। इसे लिखित रूप दे दिया जाए।
डॉ. अम्बेडकरः मैं इसका समर्थन करता हूं।
* * * *
डॉ. अम्बेडकरऽऽः श्री शिवा राव ने जो रुख अपनाया है, वह यह है कि लोक सेवा आयोगों के सदस्यों की पदच्युति के मामले में विवेकाधिकार पूरी तरह गवर्नर या गवर्नर जनरल में निहित है। केवल इस तथ्य से कि विधान-मंडल ने बहुमत से एक प्रस्ताव पारित किया है, पदच्युति अपने आप नहीं हो जाएगी, बल्कि गवर्नर या गवर्नर
ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि सब-कमेटी नं. 8 (सर्विसेज), पृ. 124
ऽऽ वही, पृ. 125-26