7. उप-समिति संख्या 8 (सेवाएं) - Page 117

100 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जनरल इस पर विचार करेंगे कि वह कार्रवाई की जाए या नहीं।

राजा नरेन्द्र नाथः मैं नियुक्तियों के संबंध में विधान-मंडल को हरगिज हस्तक्षेप नहीं करने दूंगा।

डॉ. अम्बेडकरः कोई भी व्यक्ति भ्रष्ट हो सकता है, ठीक उसी प्रकार जैसे न्यायाधीश भ्रष्ट हो सकते हैं। क्या इसका कोई उपचार नहीं है? हम मंत्रियों से संरक्षण का अधिकार वापस ले रहे हैं, क्योंकि हम यह महसूस करते हैं कि वे भ्रष्ट हो सकते हैं, लेकिन लोक सेवा आयोग के सदस्य भी तो भ्रष्ट हो सकते हैं और यदि हमें उनके किसी सदस्य को हटाने का अवसर ही न मिले, तो क्या स्थिति होगी?

डॉ. शफाअत अहमद खांः डॉ. अम्बेडकर ने यह स्वीकार किया है कि लोक सेवा आयोग के किसी भी सदस्य को गवर्नर ही हटा सकता है और यदि यह स्थिति है, तो सदन के पत्र लिखने से क्या लाभ? यह बहुत खतरनाक बात है कि किसी विधायी निकाय को कार्यपालिका के मामलों में हस्तक्षेप करने दिया जाए। हमें विधान-मंडलों के विमर्शी कार्य को कार्यपालिका के कार्य से बिल्कुल अलग रखना चाहिए और यदि हम इस प्रकार के किसी मामले में, जिसमें हजारों की नियुक्ति खतरे में उड़ने की आशंका हो, इन दोनों के कार्यों को मिला दें तो मैं समझता हूं कि हम ऐसा करके परेशानी मोल लेंगे और लोक सेवा आयोग से संबंधित सभी विनियमों को बिल्कुल बेकार और निरर्थक बना देंगे।

अध्यक्षः क्या ऐसा उप-समिति की मांग के अनुरूप होगा? मेरे विचार में जो आलोचना की गई है, वह बहुत ही वस्तुपरक है कि हम इस आशय का एक खंड समाविष्ट कर दें कि लोक सेवा आयोग अपने सद्व्यवहार-पर्यंत पद पर बना रहेगा और उसे यथास्थिति गवर्नर अथवा गवर्नर जनरल द्वारा पद से हटाया जा सकेगा? (हम सहमत हैं)

माननीय पी.सी. मित्तरः जब तक विधान-मंडल को विशिष्ट रूप से सम्मिलित न किया जाए, मैं इससे सहमत हूं।

अध्यक्षः क्या यह संशोधन उप-समिति की इच्छा के अनुकूल होगा? (हम सहमत हैं) हम इस पर रिपोर्ट के अवसर पर विचार करेंगे, इस समय तो हम इस पर अंतरिम रूप से विचार कर रहे हैं।

अब हम कर्नल गिडने के मुद्दे पर आते हैं।

डॉ. अम्बेडकरः कर्नल गिडने के प्रस्ताव पर चर्चा करने से जब प्रारूप पढ़ा गया था, तो उसमें एक खंड था, जिसमें कहा गया कि लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को, जो उस आयोग के सदस्य के नाते पदासीन नहीं है, ताज के अधीन सेवा का पात्र नहीं होगा।

अध्यक्षऽः फिलहाल तो मैं आपके समक्ष वह सुझाव रखता हूं। क्या आप उस स्थिति में इन शब्दों को हटाने की कृपा करेंगे ‘को प्रांतीय प्रबंध के अधीन रख दिया

ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि सब-कमेटी नं. 8 (सर्विसेज), पृ. 128