उप-समिति संख्या 8
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जाए’, और उसके स्थान पर ये शब्द समाविष्ट कर देंगे ‘को उसके बाद अखिल भारतीय स्तर पर भर्ती न किया जाए’?
‘और हम इन दो सेवाओं के संबंध में कोई विशेष सिफारिश करना नहीं चाहते।’
‘हम सिफारिश करते हैं कि भारतीय सिविल सेवा और भारतीय पुलिस सेवा के लिए अखिल भारतीय स्तर पर भर्ती जारी रहनी चाहिए। (श्री शिवा राव ने असहमति प्रकट की)।’
मुझे मालूम नहीं है कि वे अकेले हैं या कोई उनके साथ है।
डॉ. अम्बेडकरः मेरा संकल्प यह है कि इन दोनों सेवाओं में यूरोपीय मूल के अतिरिक्त शेष सेवाओं का प्रांतीयकरण कर दिया जाए।
अध्यक्षः मैं समझता हूं, इसे अलग से रखा जाएगा। ‘(शिवा राव इस निष्कर्ष से असहमत हैं। उनकी इच्छा है कि सभी सेवाओं का तत्काल प्रांतीयकरण कर दिया जाए)’।
मेरा सुझाव है कि हम यहां यह जोड़ देंः ‘कुछ सदस्यों की राय है कि न्यायिक पदों के लिए भर्ती इसके बाद से भारतीय सिविल सेवा में से न की जाए।’
* * * *
डॉ. अम्बेडकरऽः मैं दोनों सेवाओंऽऽ को प्रांतीय स्तर का बनाने के पक्ष में हूं, लेकिन मैं इन दोनों सेवाओं में यूरोपीय मूल के पक्ष में अपवाद के लिए तैयार हूं।
श्री जफरुल्ला खांः मैं डॉ. अम्बेडकर से सहमत हूं।
सरदार संपूरन सिंहः मैं भी इस विचार का अनुमोदन करता हूं।
अध्यक्षः मैं आपका बहुत आभारी हूं। इसे अवश्य शामिल किया जाएगा।
डॉ. अम्बेडकरः पृ. 2 पर पैराग्राफ में, जो इस तरह शुरू होता है ‘निस्संदेह ऐसी सरकार यदि मांग करे’ आदि-आदि, आपने लोक सेवाओं आदि के विभागों के पुनर्गठन और पुनर्समायोजन के प्रश्न का उल्लेख किया है। क्या मैं यह जान सकता हूं कि आप आज सवेरे हुई चर्चाओं को देखते हुए वेतन के आधार का प्रश्न भी जोड़ना चाहेंगे?
अध्यक्षः यह बात उन शब्दों में आ गई है शायद।
चौथी बैठक - 9 जनवरी, 1931
लॉर्ड जैटलैंडऽऽऽः जी नहीं। आप स्थानीय सरकार का क्षेत्राधिकार वापस नहीं ले सकते, क्योंकि स्थानीय सरकार को सर्वसम्मति से अपने अधिकारों में सर्वोपरि होना चाहिए, लेकिन यह निर्धारित किया जा सकता है कि इसी परिपाटी को अपनाना वांछनीय है। महोदय! इसमें वह सब आ गया, जो मैं उप-समिति के समक्ष प्रस्तुत करना चाहता हूं। मुख्य मुद्दा यह सुनिश्चित करना है कि पुलिस अधिनियम, 1861 द्वारा महानिरीक्षक
ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि सब-कमेटी नं. 8 (सर्विसेज), पृ. 132
ऽऽ भारतीय सिविल सेवा एवं पुलिस सेवा
ऽऽऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि सब-कमेटी नं. 8 (सर्विसेज), पृ. 181-82