7. उप-समिति संख्या 8 (सेवाएं) - Page 122

उप-समिति संख्या 8

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रोजगार दिलाने के मामले में उदार नीति अपनाई जाए और यह विशेष रूप से सिफारिश करती है कि पुलिस और सेना की भर्ती, जिससे मैं उन्हें इस समय अलग रखा गया है, अब उनके लिए खोल दी जाए।’

श्री चिंतामणिः उनको नियमतः अलग रखा गया है या केवल व्यवहार में ऐसा होता आया है?

डॉ. अम्बेडकरः नियम के द्वारा पुलिस सेवा आयोग में यह स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है कि दलित वर्ग अपात्र है।

श्री चिंतामणिः यदि कुछ विशिष्ट विभागों, जैसे पुलिस और सेना, से दलित वर्गों को अलग रखे जाने संबंधी नियम हैं भी तो वे ऐसे नियम नहीं होंगे, जो समस्त देश पर लागू होते हों। इस प्रकार के कुछ नियम कुछ प्रांतों में होंगे, सबमें नहीं।

डॉ. अम्बेडकरः यदि ऐसा वांछनीय हो, तो मैं अपने प्रस्ताव का अंतिम अंश इस प्रकार रखना चाहूंगा ‘और विशेष रूप से सिफारिश करती है कि उन्हें (दलित वर्गों को) इसके बाद उनकी अस्पृश्यता के कारण लोक सेवा के किसी भी विभाग से बाहर नहीं रखना चाहिए’।

राजा नरेन्द्र नाथः बिल्कुल, यह बात खंड (5) (क) में आती है।

माननीय कावसजी जहांगीरः वस्तुस्थिति यह है कि इस समुदाय को इसलिए अलग कर दिया गया है कि उन्हें रोजगार देना अव्यावहारिक है। इसकी तफसील में इस समय जाने से कोई लाभ नहीं। यदि हमारे पास दलित वर्गों के लिए अलग से कोई अनुभाग होता, तब भी ऐसे वर्गों के सदस्यों के लिए यह परेशानी होती कि उन्हें उन लोगों के बीच सिपाही का काम करना पड़ता, तो उनसे संतुष्ट नहीं रहते। यह बात स्पष्ट नहीं है कि इस भारी असुविधा को किस तरह दूर किया जाए? मैं इस पर कोई राय नहीं दे सकता। जो कुछ हुआ है, वह बहुत ही अनिच्छा से किया गया है, जिसे मैं समझता हूं कि डॉ. अम्बेडकर स्वीकार करेंगे। लेकिन मुझे यह सब कुछ कहने में भी कोई आपत्ति नहीं दिखाई देती, जो डॉ. अम्बेडकर हमसे करवाना चाहते हैं, हालांकि वह नेक भाव मात्र ही होगा। मेरा ख्याल है कि हमने यही राय सैकड़ों बार व्यक्त की है और उनका परिणाम शून्य रहा है। डॉ. अम्बेडकर अच्छी तरह जानते हैं कि किस प्रकार के आदेश पारित किए गए हैं और किस प्रकार वे अव्यवहार्य सिद्ध हुए हैं। इसके बावजूद मैं उस पैराग्राफ के समावेश का समर्थन करता हूं, जिसका उन्होंने प्रस्ताव किया है। हम यह जोखिम उठा रहे हैं और यह जानते हैं कि संभव है यह व्यावहारिक प्रस्ताव सिद्ध न हो। लेकिन जैसा आपने पहले कभी कहा है, यदि हम किसी आदर्श की ओर उन्मुख हों, तो यह हमेशा संभव नहीं कि वह तर्कपूर्ण भी हो।

डॉ. अम्बेडकरः मुझे विशेष रूप से इस बात की चिंता है कि पुलिस और सेना का उल्लेख किया जाना चाहिए, क्योंकि यही वे विभाग हैं, जिनके लिए दलित वर्गों के सदस्य सबसे अधिक उपयुक्त होंगे।