106 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अध्यक्षः यह बात पैराग्राफ (5) (क) और (ख) में आ गई है।
डॉ. अम्बेडकरः उस तरह तो एंग्लो-इंडियन समुदाय का प्रश्न भी उसी में शामिल हो गया। मैं खंड (4) के बाद एक नए खंड का प्रस्ताव रखना चाहता हूं। ‘उप-समिति की इच्छा है कि लोक सेवाओं में दलित वर्गों के नियोजन के मामले में उदार नीति अपनाई जाए और विशेष रूप से यह सिफारिश करती है कि पुलिस और सेवा विभागों में भर्ती, जिससे अब तक वे बाहर रखे गए हैं, उनके लिए खोल दी जाए’।
राजा नरेन्द्र नाथः मैं एक सुझाव देना चाहता हूं और वह यह है कि हम उसमें यह जोड़ दें ‘किसी भी व्यक्ति को देश की किसी भी सेवा में प्रवेश के लिए धर्म, जाति या लिंग के आधार पर न तो अयोग्य समझा जाएगा और न ही उसके साथ किसी प्रकार का भेदभाव बरता जाएगा।’ मैं एक विशेष सिफारिश के रूप में इसका समावेश चाहता हूं।
डॉ. अम्बेडकरः इस पर बाद में चर्चा होगी।
श्री बसुः मुझे डॉ. अम्बेडकर से सहानुभूति है कि वह चाहते हैं कि वे अयोग्यताएं समाप्त कर दी जाएं, जिनसे उनके समुदाय को क्षति पहुंचती है और यदि किसी प्रांत में प्रशासनिक नियमों के अंतर्गत किसी प्रकार की अयोग्यता निर्धारित कर दी गई है, तो वह तत्काल समाप्त कर दी जाए। लेकिन उन्होंने जिस तरह यह प्रस्तुत किया है, इससे बात बहुत सामान्य हो गई है। उदाहरण के लिए मेरे प्रांत में अनेक पदों पर दलित वर्गों के सदस्य ही बैठे हुए हैं। यह कोई ऐसा मामला नहीं है, जिसका मेरे प्रांत से गहरा संबंध हो।
डॉ. अम्बेडकरः मैं कुछ सीमा संबंधी शब्द शामिल करने के लिए तैयार हूं जैसे, ‘जहां उन्हें इस समय बाहर रखा गया है’।
राजा नरेन्द्र नाथः ऐस कोई नियम नहीं है, जो उन्हें पुलिस में रोजगार देने से वंचित करे। लेकिन व्यवहार में उन्हें रोजगार नहीं दिया जाता। एक बार परिषद के एक सदस्य ने यही प्रश्न उठाया था और सरकार से पूछा था कि इन लोगों को पुलिस में क्यों भर्ती नहीं किया जाता और क्या यह परिपाटी भारत सरकार अधिनियम की धारा 96 का उल्लंघन नहीं है? उसका जो उत्तर दिया गया, वह संतोषजनक नहीं था। मेरा ख्याल है कि जिन शब्दों का मैंने सुझाव दिया है यदि उन्हें जोड़ दिया जाए, तो कुछ लाभ हो सकता है। साथ ही सामान्य इच्छा और सामान्य सिफारिश भी लाभकर सिद्ध होगी। लेकिन मैं आपको यह भी बता दूं कि सामान्य भावना की अभिव्यक्ति उतनी कारगर नहीं होगी, जितनी कि मेरे द्वारा सुझाए गए शब्दों के समावेश से होगी।
मेजर स्टैनलेः सैनिक सेवा का सुस्पष्ट उल्लेख निश्चय ही इस समिति के विषय-क्षेत्र से बाहर है।
श्री मोदीः हमने सिफारिश की है कि सेना की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा