उप-समिति संख्या 8 ( सेवाएं)
जाए।
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अध्यक्षः मेरा ख्याल है कि यदि आप यह कहें, तो इसे कुछ कम विवादास्पद बनाया जा सकता है ‘और विशेष रूप से सिफारिश करते हैं कि सभी सेवाओं में उनके लिए भर्ती खोल दी जाए’।
श्री मोदीः जी हां, जिससे उन्हें अब तक वंचित रखा जाता रहा है।
अध्यक्षः मैं यह नहीं कहूंगा, क्योंकि इससे विवाद उत्पन्न हो जाएगा। आप यही कहना चाहते हैं कि सभी सेवाओं में भर्ती के द्वार उनके लिए खोल दिए जाएं।
लैफिट. कर्नल गिडनेः उनको ऐसे रोजगार के लिए किसी प्रकार से योग्य नहीं माना जाएगा।
अध्यक्षः क्या मैं यह बात कह सकता हूं कि यदि हम चाहते हैं कि यह रिपोर्ट सबकी समझ में आ जाए, तो इसमें ऐसे दो पैराग्राफ का रखना जिनमें ठीक वही बात कही गई हो, कुछ अनुपयुक्त प्रतीत होता है, इसलिए मैं डॉ. अम्बेडकर को यह सुझाव देना चाहता हूं कि यदि हम यही शब्द चाहते हैं, तो बेहतर हो कि खंड 5 के बाद आएं। हमें अपनी सामान्य सिफारिशें खंड 5 में रखनी चाहिएं ओर उसके बाद मेरा सुझाव है कि खंड 5 के अंत में हम एक पैराग्राफ जोड़ दें, जिसमें ‘यह सिफारिश करते हुए’ स्पष्ट किया गया अर्थात्, उप-समिति का संकेत विशेष रूप से खंड 5 में दी गई सिफारिश दलित वर्गों से हैं।
डॉ. अम्बेडकरः बहुत अच्छा।
अध्यक्षः यदि आपको आपत्ति न हो तो हम खंड 5 पर पहले चर्चा कर लें और फिर देखें कि उस आशय के किसी खंड को जोड़ने की आवश्यकता है या नहीं। क्या किसी को खंड 5 के प्रारूप पर कोई टिप्पणी करनी है?
राजा नरेन्द्र नाथः इस बारे में मैं कह चुका हूं। मैंने यह सुझाव दिया था कि ‘अयोग्यता’ के बाद आपको यह जोड़ देना चाहिए - ‘न ही उसके साथ किसी प्रकार का पक्षपात किया जाएगा’।
अध्यक्षः मैं चर्चा के लिए इसे बाद में पेश करूंगा। हम इस विषय पर बाद में चर्चा करेंगे।
डॉ. अम्बेडकर का सुझाव है कि खंड 5 पारित करने के बाद हम ये शब्द जोड़ दें, ‘उप-समिति ने यह सिफारिश करते समय दलित वर्गों की समस्या का विशेष रूप से ध्यान रखा है। इसकी इच्छा है कि लोक सेवाओं में दलित वर्गों के रोजगार के मामले में उदार नीति अपनाई जाए और विशेष रूप से यह सिफारिश करती है कि उनके लिए सभी सेवाओं में, जिसमें पुलिस सेवा भी शामिल है भर्ती के लिए, दरवाजे खोल दिए जाएं।’ यह संशोधन डॉ. अम्बेडकर ने प्रस्तावित किया है, जिसे खंड 5 के अंत में समाविष्ट किया जाना है।
जो इसके पक्ष में हो और जो विपक्ष में हों, वे कृपया सूचित करें_ संशोधन पारित हुआ।