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पूर्ण अधिवेशन (सामान्य पुनर्विलोकन)
आठवीं बैठक - 19 जनवरी, 1931
भावी संविधान में दलित वर्गों के संरक्षणों के लिए
सुस्पष्ट और ठोस प्रावधानों की मांग
डॉ. अम्बेडकरऽः प्रधानमंत्री महोदय! गोलमेज सम्मेलन को ऐसे दो सबसे अधिक महत्व के प्रश्नों से जूझना पड़ा है, जो निश्चय ही किसी भी समुदाय के राजनीतिक जीवन को संगठित करने के किसी भी प्रयास में निश्चय ही उभरते हैं। उत्तरदायी सरकार की समस्या उनमें से एक थी और दूसरी थी प्रतिनिधि सरकार की।
प्रांतों में उत्तरदायी सरकार के प्रश्न पर मुझे बहुत थोड़ा ही कहना है। मैं समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करता हूं और जिन मुद्दों पर मेरा मतभेद है, उनको छोड़कर मैं उसका समर्थन करता हूं। लेकिन जहां तक केंद्र में उत्तरदायी सरकार का प्रश्न है, मैं मानता हूं कि मेरा मत भिन्न है। यह कहना बेईमानी होगी कि संघीय संरचना जिससे कि हम आज परिचित हैं, उप-समिति की रिपोर्ट में सरकार के नौकरशाह स्वरूप में, किसी प्रकार के परिवर्तन पर विचार नहीं किया गया है। लेकिन मेरे लिए आपसे अपनी यह राय छिपाना भी उतनी ही बेईमानी होगी कि यह परिवर्तन दिखाने मात्र का है, सारपूर्ण नहीं है और जिसे उत्तरदायी कहा गया है, यह मिथ्या है, वास्तविक नहीं।
लॉर्ड चांसलर ने हमें बताया था कि उन्होंने बीजारोपण कर दिया है। अब इस पौधे की देखभाल करना हमारा काम है। महोदय, हम दरअसल लॉर्ड चांसलर के बहुत आभारी हैं, जिन्होंने इस महत्त्वपूर्ण सम्मेलन में प्रमुख भूमिका का निर्वाह किया है। मैं उनका आभारी हूं। लेकिन मुझे यह उम्मीद नहीं है कि उन्होंने जो पौधा लगाया है, वह बढ़ेगा भी। मेरा ख्याल है कि उन्होंने जिस बीज का चुनाव किया है, उसका दाना फलहीन है और जिस मिट्टठ्ठी में उन्होंने उसे बोया है, वह उसके बढ़ने के लिए अनुकूल नहीं है।
ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि राउंड टेबिल कांफ्रेंस, (1930-31), प्रथम अधिवेशन, पृ. 438-41