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संघीय ढांचा समिति

23वीं बैठक - 16 सितम्बर, 1931

मद संख्या 2

(संघीय विधान-मंडल के लिए सदस्यों के चुनाव से संबंधित प्रश्न)

डॉ. अम्बेडकरऽः अध्यक्ष महोदय! मैं संघीय संरचना समिति में सदस्य की हैसियत से पहली बार बोल रहा हूं। महोदय! इस समिति को किन-किन समस्याओं पर विचार करना है, इस बारे में आपने हर सदस्य को अपना-अपना सामान्य दृष्टिकोण स्पष्ट करने के लिए मौका दिया है। इस उपयुक्त अवसर का फायदा उठाते हुए हर सदस्य ने आपकी महान सेवाओं की सराहना की है, जो अध्यक्ष के रूप में आप इस समिति की कर रहे हैं। हर नए सदस्य ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय सरकार के उत्तरदायित्व के बारे में वह जो भी सहमति देगा, वह इस शर्त पर होगी कि वह जिस बिरादरी का प्रतिनिधित्व करता है, उसके हितों की रक्षा का ख्याल पहले रखा जाएगा। महोदय! मैं अपने पूर्व वक्ताओं की इस रीति का अनुसरण नहीं कर रहा हूं। इसकी वजह यह नहीं है कि इस संबंध में मेरी कोई राय नहीं है या मुझे कुछ नहीं बोलना है। बल्कि, मेरी भावनाएं तो बहुत प्रबल हैं और मैं उन्हें व्यक्त करने के बजाए, आपके इस निर्देश का जो आपने हम सबको आज शुरू में ही दिया है, पालन करना ज्यादा ठीक समझता हूं कि ऐसे सभी मुद्दों को आमतौर से समिति के विचारार्थ मंजूर हुआ समझा जाएगा।

इन कुछेक शब्दों के साथ मैं मद संख्या 2 में जो बहुत-सी उप-मदें शामिल की गई हैं, उनके बारे में अब अपने विचार प्रस्तुत करने की अनुमति चाहता हूं। आपने हम सबको जो ज्ञापन दिया है, उसमें इन उप-मदों को जिस क्रम से रखा गया है, मैं उस क्रम का अनुसरण तो नहीं कर रहा हूं और इस ज्ञापन में जितनी उप-मदों को शामिल किया गया है, उनमें से हर मद पर मैं बोलना भी नहीं चाहता। मैं सिर्फ उन्हीं विषयों पर बोलूंगा, जिन पर कुछ कहने के लिए मेरे पास कुछ ठोस प्रमाण हैं और जिनके संबंध

ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि फेडरल स्ट्रक्चर कमेटी एंड माइनॉरिटीज कमेटी (गोलमेज सम्मेलन, दूसरा सत्र),

भारत सरकार, केंद्रीय प्रकाशन शाखा, कलकत्ता, 1932, खंड 1, पृ. 120-32