9. संघीय संरचना समिति - Page 133

116 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

संघीय परिषद और उसकी स्थानापन्न संस्थाओं के सदस्यों का चुनाव प्रांतीय

विधान सभाओं द्वारा उनकी अपनी-अपनी अवधि के लिए अनुपात के आधार पर

प्रतिनिधित्व के सिद्धांतों के अनुसार किया जाएगा, लेकिन कम से कम एक स्थान

उस पार्टी को अवश्य मिलेगा, जो प्रांतीय विधान सभाओं में अपने स्थानों की

संख्या के आधार पर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होगी या (अगर बहुत सी पार्टियों को

समान संख्या में स्थान मिले हों) एक स्थान उस पार्टी के लिए नियत रहेगा, जिसे

प्रांतीय सभा के पिछले चुनाव में दूसरे स्थान पर सबसे अधिक मत प्राप्त हुए हैं।

जब बहुत-सी पार्टियों के दावे एक समान हों, तब इसका निर्णय पर्ची निकालकर

किया जाएगा।

मैं यह नहीं कह रहा हूं कि इस पाठ को ज्यों का त्यों भारतीय संविधान में शामिल कर लिया जाए। लेकिन वहां पर बताया गया है कि अनुपात के आधार पर प्रतिनिधित्व की व्यवस्था के साथ-साथ एक ऐसा उपबंध भी रहे, जिससे प्रतिनिधित्व की मात्रा सुनिश्चित की जा सके, तो इसे हमारे संविधान में भी अपना लिया जाना चाहिए।

संघीय विधान-मंडल में ब्रिटिश भारत के प्रांतों को प्रतिनिधित्व दिए जाने के बारे में मुझे सिर्फ इतना ही कहना था। मैं अब इस विषय के दूसरे पक्ष पर, अर्थात् संघीय विधान-मंडल में देशी राज्यों के प्रतिनिधित्व के बारे में कहना चाहता हूं। इस पर विचार करते समय दो सवाल पैदा होते हैं। पहला यह है कि क्या हर राज्य को अलग-अलग प्रतिनिधित्व दिया जाए या प्रतिनिधित्व देने के लिए इनको वर्गों में बांट दिया जाए और दूसरा यह है कि इनको प्रतिनिधित्व किस तरह दिया जाए - चुनाव के द्वारा या नामजदगी के द्वारा।

मैं पहले सवाल को लेता हूं। संघीय संरचना उप-समिति ने सिफारिश की है कि यह मामला राज्यों पर छोड़ दिया जाना चाहिए। उप-समिति की इस सिफारिश से मैं सहमत न हो सकूंगा। मैं यह मानने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हूं कि यह एक ऐसा मामला है जिस पर राज्यों को निर्णय करना चाहिए। मेरा दृष्टिकोण तो यह है कि संघीय संरचना समिति को यह तय करना चाहिए कि जो संघीय संविधान हम बनाने जा रहे हैं, उसमें किस इकाई को वह संघीय संविधान की इकाई मानती है। कृपया यह विचार करें कि अगर सारा मामला देशी राज्यों पर छोड़ दिया गया, तब उसके क्या परिणाम होंगे? सबसे पहले तो मैं यह अनुमान करता हूं कि भारतीय संघ में हर राज्य का प्रतिनिधि रहेगा। अगर ऐसा होता है, तब मेरा निवेदन है कि भारत में जो संघ बनेगा, वह एक विशालकाय संघ होगा। आइए, इस पर तुलनात्मक दृष्टि से विचार करें। जर्मन साम्राज्य के संघ राज्य में सिर्फ 25 इकाइयां हैं। ऑस्ट्रेलिया में सिर्फ 5, ऑस्ट्रिया में 8, कनाडा में 4, स्विट्जरलैंड में 22 और अमरीका में, जो अब तक का सबसे बड़ा संघ है, 48 इकाइयां हैं। अगर मैं यह मानकर चलूं कि हर राज्य को प्रतिनिधित्व दिया जाना है, तब