संघीय ढांचा समिति
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हमारे संघ में लगभग 530 इकाइयां होंगी। दूसरी ओर, अगर हम यह मानें कि हम जिस संघ की परिकल्पना कर रहे हैं, उसमें सभी राज्यों को प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाना है, तब जो सवाल उठता है, वह यह है कि उस आदर्श का क्या होगा, जो हमने अपने लिए निश्चित कर रखा है? यह आदर्श है कि हमारे नए संविधान में, जो हम बनाने जा रहे हैं, भारत के हर भाग को प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। अगर कोई राज्य प्रतिनिधित्व से हमेशा के लिए वंचित हो जाएगा, उसका क्या होगा? यह एक समस्या है, जिस पर हमें विचार करना होगा।
अध्यक्ष महोदय! मैंने यह सवाल इसलिए नहीं उठाया है कि भारतीय संघ में जिन राज्यों को प्रतिनिधित्व दिया जाना है, उनकी संख्या के बारे में मैं चिंतित हूं। मुझे जो चिंता खाए जा रही है, वह यह है कि इस सवाल के बावजूद कि जिन इकाइयों को इस प्रकार मान्यता दी जाएगी, क्या वे आधुनिक सभ्यता के बोझ को सहन करने में समर्थ हैं, क्या हम भारत के भावी संघ में भारत के हर राज्य को एक स्वतंत्र इकाई के रूप में मान्यता देंगे? या हम अपने संघ में उन्हीं इकाइयों को शामिल करेंगे, जिनमें न्यूनतम सामर्थ्य होगी? जब हम देशी राज्यों के बारे में इस दृष्टि से विचार करने लगेंगे, तब निश्चित ही हमें उन विभिन्न परिस्थितियों की पूरी जानकारी नहीं होगी, जो इन विभिन्न राज्यों में हमें देखने को मिलेगी। अध्यक्ष महोदय! आपकी अनुमति से मैं यहां एक संक्षिप्त अंश पढ़ रहा हूं, जिसमें मौजदू देशी राज्यों का वर्णन किया गया है। यह अंश मैं श्री डी.वी. गुंडप्पा की दि स्टेट्स एंड देयर पीपुल इन दि इंडियन कांस्टीट्यूशन नामक पुस्तक से पढ़ रहा हूं। असल में यही स्थिति है। उन्होंने एक तालिका दी है। मैं समिति की सुविधा के लिए यह तालिका नहीं पढूंगा, लेकिन इस पर उनकी टिप्पणी को सुना रहा हूंः
ऊपर दी गई तालिका से यह स्पष्ट है कि कुल 454 राज्य ऐसे हैं, जिनका
क्षेत्रफल 1,000 वर्ग मील से कम है, 452 राज्यों की आबादी एक लाख से भी
कम है और 374 राज्यों का राजस्व एक लाख रुपए से कम है। ब्रिटिश भारत का
क्षेत्रफल 10,94,300 वर्ग मील है, आबादी लगभग 22.2 करोड़ है और इसमें 273
जिले हैं। इस तरह ब्रिटिश भारत में एक जिले का औसत क्षेत्रफल 4000 वर्ग मील
और यहां की औसत आबादी लगभग 8 लाख है। अगर यह सुझाव दिया गया होता
कि ब्रिटिश भारत के हर जिले को एक राज्य बना दिया जाए, तब विचार करने पर
यह कितना भोंडा लगेगा? हमारे 562 राज्यों में से सिर्फ 30 राज्य ऐसे हैं, जिनका
क्षेत्रफल, जिनकी आबादी और राजस्व के लिए जिनके साधन, ब्रिटिश भारत के
एक औसत जिले के बराबर हैं। कुछ राज्य तो इतने छोटे हैं कि उन्हें राज्य कहने
में संकोच होता है। लगभग 15 ऐसे राज्य हैं, जिनका क्षेत्रफल मुश्किल से एक वर्ग
मील भी नहीं है। 27 ऐसे राज्य हैं, जिनका क्षेत्रफल मात्र एक वर्ग मील है। सूरत
जिले में 14 राज्य हैं और 1925 की सूची के अनुसार उनमें से किसी भी राज्य