118 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
का राजस्व पिछले वित्तीय वर्ष में 3000 रुपए भी नहीं रहा। इनमें से तीन राज्य
ऐसे हैं, जहां 100 व्यक्ति भी नहीं रहते हैं और पांच ऐसे हैं जिनका राजस्व एक
सौ रुपए भी नहीं है।
इस पुस्तक में सबसे कम राजस्व एक वर्ष में बीस रुपए बताया गया है।
महाराजा बीकानेरः मैंने कल जो कुछ कहा था, क्या इससे उसकी पुष्टि नहीं होती कि भारतीय राज्यों में ऐसी इकाइयों को राज्य या पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर राज्य मानने के बारे में गलतफहमी है?
डॉ. अम्बेडकरः नहीं, कोई गलतफहमी नहीं है।
महाराजा बीकानेरः इसे भी देशी राज्य समझा गया और वही गलती हुई, जो पहले हुई थी। इस बारे में माननीय मिर्जा कुछ और बता सकेंगे।
डॉ. अम्बेडकरः हो सकता है, महाराजा बीकानेर! अत्यंत आदरपूर्वक आपसे मैं यह सवाल करता हूं। अगर राज्य के बारे में आपकी कोई विशेष परिभाषा है और अगर भारतीय संघ में राज्यों को शामिल करते समय आप इस परिभाषा को लागू करने जा रहे हैं, तब हम यह जानना चाहते हैं कि उन राज्यों का क्या होगा, जो उनके मत के अनुसार निश्चित परिभाषा में छूट जाते हैं?
महाराजा बीकानेरः मेरा विचार है कि इस सवाल पर बाद में अवसर आने पर विचार कर लिया जाए।
डॉ. अम्बेडकरः संघीय संरचना समिति आंख बंद कर राज्यों को वह सब कुछ नहीं दे सकती, जो वे मांगते हैं।
महाराजा बीकानेरः राज्य भी ऐसा नहीं कर सकते। हम कोरे चैक पर तो दस्तखत नहीं कर सकते। हमें चाहिए कि हम एक-दूसरे की दिक्कतों को समझें।
अध्यक्षः डॉ. अम्बेडकर! इस मामले में शायद आप हमारी मदद कर सकेंगे। आपने एक बहुत ही रोचक अंश पढ़कर सुनाया है। मैंने इसे बड़े ध्यान से सुना है। लेकिन मैं आपसे यह पूछता हूं कि इस अंश को पढ़ने के बाद आप क्या निष्कर्ष निकाल रहे हैं?
डॉ. अम्बेडकरः मैं जो बात कर रहा हूं, वह यह है कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण अवसर है। मैंने इसका उल्लेख इसलिए किया है कि अगर आप एक बार यह प्रस्ताव मान लें कि हर राज्य को भारतीय संघ में शामिल होने का हक है, चाहे वह जैसा भी हो, तब आप उस राज्य को हमेशा बने रहने का स्वतंत्र अधिकार दे रहे होंगे।
महाराजा बीकानेरः यह अधिकार उसे अभी भी है।
डॉ. अम्बेडकरः यह अधिकार ब्रिटिश सरकार की कृपा के कारण है। लेकिन मेरा निवेदन है कि यह एक ऐसी परिस्थिति है, जो मैं सोच भी नहीं सकता और इससे