9. संघीय संरचना समिति - Page 136

संघीय ढांचा समिति

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सहमत नहीं हो सकता। यही कारण है कि आजकल के दिनों में वही इकाई उसी मानक के अनुसार बनी रह सकती है, जैसी कि आधुनिक सभ्यता निश्चित करेगी, बशर्ते उस राज्य के पास राजस्व के पर्याप्त साधन उपलब्ध हों। मैं समझता हूं कि भारत के राजाओं को इस तरह खुश करने से कोई लाभ नहीं होगा और वह भी केवल इसलिए कि वह अपने राज्य को एक अलग इकाई मानने से अपने को राजा-महाराजा कहे जाने पर खुश होते हैं, चाहे इससे उनकी प्रजा को कोई लाभ होता हो अथवा नहीं।

महाराजा बीकानेरः उन्हें राजा-महाराजा नहीं कहा जाता है।

डॉ. अम्बेडकरः मेरा निवेदन है कि इस समिति को कुछ अर्हताएं निश्चित कर देनी चाहिएं, जो हर राज्य को भारतीय संघ में शामिल होने के पूर्व जरूर पूरी करनी चाहिएं।

अध्यक्षः यह बहुत अच्छी बात है। यह अर्हताएं क्या हों, क्या यह निश्चित करने में आप हमारी सहायता करेंगे?

डॉ. अम्बेडकरः मैं इसके लिए कुछ निश्चित भू-भाग और कुछ निश्चित राजस्व नियत करना चाहता हूं। यह भू-भाग कितना हो, राजस्व कितना हो, इस बारे में एकदम से तो मैं नहीं बता सकता, लेकिन मेरा यह कहना है कि अगर किसी राज्य का शासक यह चाहता है कि उसका राज्य पूर्ण रूप से एक आत्म-निर्भर राज्य के रूप में रहे और भारतीय संघ का भाग बने, तब उसे यह सिद्ध करना होगा कि उसके राज्य के पास अपनी प्रजा के लिए एक सुसंस्कृत जीवन उपलब्ध कराने के लिए अपेक्षित संसाधन और सामर्थ्य है। मेरी यही कसौटी है।

माननीय मानेकजी दादाभाईः अपने मित्र के इस वक्तव्य से क्या मैं यह समझूं कि वह ऐसे राज्यों को संघ में शामिल किए जाने की अनुमति नहीं देंगे, जिनका भू-क्षेत्र छोटा है और जिनका राजस्व भी अल्प है?

डॉ. अम्बेडकरः अब मैं प्रश्न के दूसरे पक्ष पर, अर्थात् संघीय विधान-मंडल में भारतीय राज्यों को प्रतिनिधित्व दिए जाने के बारे में कुछ कहना चाहता हूं। भारतीय राज्यों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे भारतीय संघ में तभी शामिल होंगे, जब उन्हें संघीय विधान-मंडल में अपने प्रतिनिधियों को नामजद करने की छूट दी जाएगी। भारतीय राज्यों के राजा-महाराजाओं के प्रति अत्यंत आदर व्यक्त करते हुए मैं यह कहना चाहता हूं कि मैं उनकी इस बात से सहमत नहीं हूं और मैं इस बात पर जोर दूंगा कि उनके राज्यों का प्रतिनिधित्व चुनाव के द्वारा होगा। अध्यक्ष महोदय! इस विषय पर अपनी बात करते हुए मैं इस तथ्य की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं कि जहां तक मुझे मालूम है, सिर्फ एक संविधान को छोड़कर, जिसका नाम क्षणभर में अभी बता दूंगा, किसी भी संविधान का ऐसा कोई उदाहरण नहीं है, जहां राज्य सरकारों को संघीय विधान-मंडल में अपने प्रतिनिधियों को नामजद करने की अनुमति मिली हुई है। यह मानना एक बात