9. संघीय संरचना समिति - Page 144

संघीय ढांचा समिति

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की दक्षता बनाए रखने के लिए जरूरी समझता है, और अंतिम बात यह है कि जिस किसी विधेयक के बारे में गवर्नर को आपत्ति हो उसको अस्वीकृत करने के लिए उसे विशेषाधिकार मिला हुआ है। अध्यक्ष महोदय! निवेदन है कि जिन सुरक्षा उपायों का मैंने उल्लेख किया है, अर्थात् आरक्षित विषयों के प्रभारी व्यक्ति का हटाया न जा सकना, उसके वेतन के बारे में मतदान का न हो सकना, खर्च को प्रमाणित करने की शक्ति का गवर्नर में निहित होना, आरक्षित विषयों की सुरक्षा के लिए बिलों को प्रमाणित करने की शक्ति और किसी भी विधेयक को अस्वीकृत करने की गवर्नर की सर्वोच्च शक्ति, ऐसे सुरक्षा उपाय हैं, जो मेरे विचार से उन विषयों को अक्षुण्य बनाए रखने के लिए बहुत पर्याप्त हैं, जिन्हें राज्य विषय कहा जाता है।

माननीय तेज बहादुर सपू्रः इस स्तर पर क्या मैं आपसे एक प्रश्न पूछ सकता हूं? आपका सुझाव है कि प्रमाणित करने की शक्ति रहनी चाहिए।

डॉ. अम्बेडकरः मैं यह सुझाव नहीं दे रहा हूं कि प्रमाणित करने की शक्ति होनी चाहिए। मैं इस बारे में बाद में बोलूंगा। मैं जो कह रहा हूं, वह सरकारी सदस्य की नामजदगी के अलावा वे अन्य विकल्प हैं, जो संविधान में दिए हुए हैं। यही मेरा तर्क है। मेरा निवेदन है कि जब आपके पास सरकार में उन विषयों की सुरक्षा के लिए, जिन्हें राज्य विषय कहा जाता है, इतनी प्रचुर विधायी और कार्यान्वयन संबंधी शक्तियां हैं, तब विधान परिषद में सरकारी सदस्यों की व्यवस्था करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है।

दूसरे, मेरा यह कहना है कि नामजद सरकारी सदस्यों का ब्लॉक बनाकर आप उन बातों को छिपा रहे हैं, उन बातों पर पर्दा डाल रहे हैं, जो इस समय हो रही हैं। अगर नामजद सरकारी सदस्यों का ब्लॉक नहीं होता, तब विधान परिषद बहुत से उपायों को पारित कर चुकी होती और जिन्हें गवर्नर खुशी-खुशी अनुमोदित कर देता या अपनी विशेष शक्तियों के अधीन कर देता। लेकिन नामजद सरकारी सदस्यों का ब्लॉक होने से आपने एक विरोधात्मक स्थिति उत्पन्न कर दी है, आप बाहरी दुनिया को तो यह दिखाते हैं कि विधान परिषद बहुसंख्यकीय शासन के आधार पर सामान्य रूप से काम कर रही है, जबकि स्थिति यह है कि अल्पसंख्यक दल द्वारा सरकारी सदस्यों की सहायता से निर्णय लिए जाते हैं। इसलिए मेरा निवेदन है कि भारत के भावी संविधान में इस नामजद सरकारी सदस्यों का ब्लॉक लाने की कोई उपयोगिता नहीं है।

एक आखिरी विषय है, जिस पर मैं चर्चा करना चाहता हूं। यह विषय है, शपथ। मेरे विचार में यह बहुत बड़ा विषय है और यह ऐसा सवाल है, जिसमें से एक दूसरा बड़ा सवाल पैदा होता है। मेरे पास समय थोड़ा है। मैं सोचता हूं कि इतने थोड़े से समय में इस संपूर्ण विषय पर चर्चा पूरी नहीं कर सकूंगा। इसलिए मेरा अनुरोध है कि एक विशेष सत्र रखा जाए, जब इस प्रश्न पर विस्तार से चर्चा की जा सके, क्योंकि मेरी धारणा है कि जब तक समान नागरिकता नहीं होगी, तब तक कोई वास्तविक संघ नहीं बन सकता। यह एक ऐसा विषय है, जिस पर मैं आगे कुछ नहीं कह सकता, क्योंकि इसके लिए पर्याप्त समय नहीं है।