134 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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डॉ. अम्बेडकरऽः अब तक जो विचार प्रस्तुत किए गए हैं, उनमें एक बात पर बल दिया गया है और मैं समझता हूं कि यह सभी में एक समान है। और वह यह कि भारत के भावी संविधान में दोनों सदनों के संबंधों को विनियमित करते समय उन्हें स्तर की समानता, शक्तियों की समानता प्रदान की जानी चाहिए, सिवाए कुछ छुटपुट बातों को छोड़कर, जैसे वित्त विधेयक को प्रस्तुत करने का अधिकार और मत देने का अधिकार। इस बात को ध्यान में रखते हुए मैं समझता हूं कि सामान्य सर्वसम्मत मत यह था कि इन दोनों सदनों की स्थिति समान होनी चाहिए।
अब मैं अपने पूर्व वक्ताओं के प्रति पूरा आदर भाव व्यक्त करते हुए अत्यंत विनम्रता से कहना चाहता हूं कि मैं उनके विचारों से सहमत नहीं हो सकता। मेरे और उनके बीच जो मतभेद हैं, वह उस मामूली-सी बात को लेकर हैं कि दूसरे सदन के कार्यों और उद्देश्यों के बारे में हमारा बिल्कुल ही भिन्न दृष्टिकोण है।
मैं उन महानुभावों के दृष्टिकोण को अच्छी तरह समझता हूं, जिन्होंने कल यह अभिमत प्रस्तुत किया था कि अगर हमारा विधान-मंडल इस तरह संगठित किया गया कि हर सदन उसका प्रतिनिधित्व करे, जिसे प्राचीन भाषा में राज्य की अलग-अलग जागीर कहा जाता है, तब दोनों सदनों की शक्तियां समान होनी चाहिएं। अगर निचला सदन ऐसे वर्ग के लोगों से गठित किया गया, जिन्हें उच्च सदन में प्रतिनिधित्व नहीं मिला है और अगर उच्च सदन में ऐसे वर्गों के लोग रहे, जिन्हें साधारण सदन में प्रतिनिधित्व नहीं मिला है, तब हमें कुछ कहना ही होगा, जिससे कल कही बात स्पष्ट हो सके। लेकिन यदि हमारा विधान-मंडल ऐसे आधार पर गठित किया गया, जिसे मैं एक राज्य की अलग-अलग जागीर कहता हूं, तब मैं दो सदनों वाले विधान-मंडल बनाए जाने के लिए अपनी सहमति नहीं दूंगा, क्योंकि मैं जनता के लिए बोलता हूं - इस मामले में मैं श्री गांधी का प्रतिद्वंद्वी हूं - इसलिए मैं ऐसे विधान-मंडल के लिए अपनी स्व्ीकृति नहीं दे सकता और इस संबंध में मैं जनता के भाग्य को इस तरह की व्यवस्था के अधीन काम करने वाली सरकार को नहीं सौंप सकता। अतः मैं लॉर्ड एस्किथ के शब्दों में कहूंगा कि ऐसी सरकार धोखा है, एक प्रपंच है।
वस्तुतः, हमारे विधान-मंडल के सदनों का गठन, शायद मैं गलती नहीं कर रहा हूं, अलग-अलग जागीरों के लिए अलग-अलग प्रतिनिधित्व के आधार पर नहीं होगा। अगर मैं भावी विधान-मंडल के गठन के बारे में ठीक-ठीक समझा हूं, तो मेरा ख्याल है कि निचला सदन जनता को लेकर गठित किया जाएगा। उसमें हर वर्ग के लोग होंगे, उसमें जनता की हर विचारधारा के लोग होंगे। अगर ऐसा है, तो मेरा निवेदन है कि हमारे यहां कोई ऐसा सदन नहीं होगा, जो उसका प्रतिद्वंद्वी हो या जो बराबरी का दावा करेगा। यही
ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि फेडरल स्ट्रक्चर कमेटी एंड माइनॉरिटीज कमेटी, खंड 1, पृ. 266-70