9. संघीय संरचना समिति - Page 152

संघीय ढांचा समिति

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मेरा दृष्टिकोण है और इसलिए, अध्यक्ष महोदय! जहां तक मद संख्या 3 के उपशीर्ष (2) में उल्लिखित प्रश्न का संबंध है, मेरा उत्तर यह है कि निर्णय का अधिकार निचले सदन में निहित किया जाना चाहिए।

अध्यक्षः डॉ. अम्बेडकर! क्या आप इसे संविधान में लिखेंगे?

डॉ. अम्बेडकरः जी हां, मैं सोचता हूं कि ऐसा किया जा सकता है।

अध्यक्षः यह किया जा सकता है। लेकिन क्या आप संविधान में इसको शामिल किए जाने के पक्ष में हैं?

डॉ. अम्बेडकरः आशा है कि आप इस विषय पर मुझे बाद में बोलने की अनुमति देंगे। यह खासतौर से वित्त विधेयक के मामले में जरूरी है। मेरी राय में उच्च सदन को निचले सदन के विचारार्थ सुझाव देने का अधिकार होना चाहिए, जिसे निचला सदन अगर चाहे तो स्वीकार कर सकता है। उच्च सदन को वित्त विधेयक को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि उसमें संशोधन करने का भी अधिकार होना चाहिए और जिस रूप में निचला सदन उसे पारित करे उसी रूप में उस वित्त विधेयक को कानून बन जाना चाहिए, भले ही वह उच्च सदन द्वारा अस्वीकृत हो चुका हो।

मैं सोचता हूं कि जो प्रस्ताव मैंने प्रस्तुत किया है, वह बहुत ही क्रांतिकारी लगेगा और मैं सोचता भी यही हूं कि इसे क्रांतिकारी प्रस्ताव कहा जा सकता है। लेकिन, अध्यक्ष महोदय! अगर यह ऐसा है, तब कल जब मेरे विद्वान सहयोगी माननीय तेज बहादुर सपू्र और माननीय मुहम्मद शफी इस सवाल पर बोल रहे थे, उन्होंने अत्यंत आधुनिक संविधानों में से किसी भी संविधान का जिक्र नहीं किया। यह देखकर मुझे ताज्जुब हुआ कि उन्होंने कनाडा डोमीनियन, ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण अफ्रीका के कुछ अपेक्षाकृत पुराने संविधानों के उदाहरण दिए। कनाडा का संविधान 1867 में बना था, ऑस्ट्रेलिया का 1901 में और दक्षिण अफ्रीका का 1909 में बना था। मैं नहीं जानता कि उन्होंने यहां के हाउस ऑफ कॉमन्स और हाउस ऑफ लॉर्ड्स के बीच के संविधानात्मक संबंधों पर विचार क्यों नहीं किया? मुझे नहीं मालूम कि उन्होंने, उदाहरणार्थ आयरलैंड के दोनों सदनों के बीच के संबंधों पर जैसे कि वे हैं, विचार क्यों नहीं किया? मैं यह भी नहीं समझ पाता कि वह ब्राइस कमेटी के प्रस्तावों पर विचार करना कैसे भूल गए? अगर उन्होंने इन सब पर विचार किया होता, तब मेरे प्रस्ताव को सुनकर, जो उन्हें आश्चर्य हुआ है, वह न होता। लेकिन चूंकि उन्होंने इन सबका उल्लेख नहीं किया है, इसलिए मैं अपने प्रस्ताव का समर्थन इन सबका उल्लेख करके करूंगा। मेरा प्रस्ताव ठीक वैसा ही है, जैसा कि 1911 के पार्लियामेंट ऐक्ट में दिया गया है। वहां यह कहा गया है कि जहां तक वित्त विधेयक का संबंध है, हाउस ऑफ लॉर्ड्स इस पर विचार कर सकता है, लेकिन हाउस ऑफ कॉमन्स की परम सत्ता है। इस अधिनियम में यह कहा गया है कि जब किसी वित्त विधेयक पर हाउस ऑफ कॉमन्स में विचार हो जाए और वह उसे पारित कर दे, तब वह कानून बन जाएगा, चाहे उस संबंध में हाउस ऑफ लॉर्ड्स की सहमति न