136 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
भी हो। लेकिन शर्त यह है कि महामहिम विधेयक पर अपनी सहमति दे दें। महोदय! यही संबंध जहां तक वित्त विधेयक का प्रश्न है, आयरलैंड के संविधान में दोनों सदनों के बीच निहित है। आयरलैंड के संविधान की धारा 35 में कहा गया हैः
वित्त विधेयक के संबंध में एतद्पश्चात् निचला सदन (सीनाड आयरेन), उच्च
सदन (डेल आयरेन) से निरपेक्ष विधायी शक्ति के रूप में परिभाषित किया जाता
है। इसके बाद धारा 38 में कहा गया हैः
उच्च सदन (डेल आयरेन) द्वारा प्रस्तावित और पारित प्रत्येक विधेयक, यदि वह
वित्त विधेयक न हो, निचले सदन (सीनाड आयरेन) को भेजा जाएगा और उसमें
वह संशोधन कर सकेगा।
लेकिन उच्च सदन (डेल आयरेन) द्वारा पारित कोई विधेयक ख्. . .,
और इसके बाद उक्त अनुच्छेद की बाकी बातें हैं।
मैं अपने प्रस्ताव की पुष्टि में अगला प्रमाण जो पेश कर रहा हूं, वह ब्राइस कमेटी की सिफारिश है। जैसा कि हम सभी जानते हैं, यह समिति एक ऐसी समिति थी, जिसमें सर्वाधिक प्रतिनिधि थे, इसके सदस्य दोनों सदनों, अर्थात् हाउस ऑफ कॉमन्स और हाउस ऑफ लॉर्ड्स से लिए गए थे। यह समिति सर्वसम्मति से इस निष्कर्ष पर पहुंची थी कि कम से कम जहां तक वित्त विधेयकों का प्रश्न है, 1911 के पार्लियामेंट ऐक्ट में जो प्रावधान किया गया है, वह सही और उचित भी है।
इसके बाद, इस प्रस्ताव के समर्थन में मैं एक तीसरा प्रमाण देता हूं। ब्राइस कमेटी की रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों को बंद करके नहीं रख दिया गया, इन पर 1922 की सम्मिलित सरकार ने विचार किया था। इस बारे में यह जानने के लिए प्रस्ताव भी किए गए (मुझे खुशी है कि लॉर्ड पील यहां इस समय मौजूद हैं) कि सरकार ब्राइस कमेटी की रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई करेगी? ये प्रस्ताव संसद में 11 जुलाई, 1922 को रखे गए थे। चौथा प्रस्ताव इस प्रकार थाः
हाउस ऑफ लॉर्ड्स वित्त विधेयकों में संशोधन या उन्हें अस्वीकृत नहीं करेगा। यह प्रश्न कि कोई विधेयक वित्त विधेयक है अथवा नहीं या यह अंशतः वित्त विधेयक है और अंशतः नहीं है, दोनों सदनों की संयुक्त स्थायी समिति को निर्णय के लिए भेजा जाएगा, जिसका निर्णय अंतिम होगा।
ब्राइस कमेटी के इस सिद्धांत को कि वित्त विधेयक से केवल हाउस ऑफ कॉमन्स संबंधित होगा, इसे स्वीकार किया गया और इन प्रस्तावों द्वारा पुष्ट किया गया। कृपया मुझे इन प्रस्तावों पर तत्कालीन भारत मंत्री विसकाउंट पील के भाषण को उद्धृत करने की अनुमति दें। इन प्रस्तावों को प्रस्तुत करते समय उन्होंने कहा था कि ये प्रस्ताव रूपरेखा मात्र हैं, जिनमें सिर्फ सिद्धांतों का उल्लेख किया गया है। उन्होंने आगे कहा था कि