142 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और उचित बात तो यह होगी कि जो भी महाराजा संघ में शामिल होने के इच्छुक हैं, उनका मत, मतों के विशिष्ट कोटा तक सीमित रखा जाना चाहिए, जो उन्हें ऐसी व्यवस्था के अधीन निर्धारित किया जाएगा, जिसका प्रस्ताव माननीय मिर्जा इस्माइल ने किया है। अगर कोई महाराजा शामिल होता है और उसका एक प्रतिनिधि होता है, तब यह एक मत देने का हकदार होगा। अगर महाराजाओं के वर्ग शामिल होते हैं और माननीय मिर्जा इस्माइल द्वारा प्रस्तावित व्यवस्था के अधीन इस वर्ग को दो मत निर्धारित किए गए हैं, तब इस वर्ग को वर्ग के रूप में शामिल होना होगा और इसे दो मत से ज्यादा मत देने का अधिकार नहीं होगा। बाकी व्यवस्था एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके बारे में कम से कम मैं अपनी सहमति नहीं दे सकता।
तीसवीं बैठक - 25 सितंबर, 1931
मद संख्या 4
(संघ और उसकी इकाइयों के बीच वित्तीय संसाधनों का वितरण)
डॉ. अम्बेडकरऽः माननीय मोहम्मद शफी ने जो मुद्दा उठाया है, मैं उसे बहुत अहम् मानता हूं। आशा है कि आप मुझे इस प्रश्न पर, बाद में ही, चर्चा करने का मौका देंगे कि संघीय संरचना उप-समिति ने विषयों को केंद्रीय और संघीय रूपों में विभाजित करने का जो सुझाव दिया है, उसे संविधान में शामिल किया जाना चाहिए। एक दूसरा सुझाव, जो मैं आपके विचारार्थ प्रस्तुत करना चाहता हूं, वह यह है कि क्या इस पर पहले विचार कर लेना और तब इसे बाद में वित्त उप-समिति को भेजना उचित नहीं होगा। इस मामले पर आपको विचार करना है। मेरा ख्याल है कि यदि हम किसी निर्णय पर पहुंच जाएं, तो ज्यादा अच्छा होगा, चाहे इधर या उधर कि क्या हम संविधान में द्वि भागीकरण की व्यवस्था रखें या यह अच्छा होगा कि हम इन विषयों को उप-समिति को विचारार्थ सौंप दें।
चौंतीसवीं बैठक - 14 अक्टूबर, 1931
मद संख्या 4
(संघ और उसकी इकाइयों में वित्तीय संसाधनों का वितरण)
संघीय वित्त उप-समिति की रिपोर्ट पर बहस
डॉ. अम्बेडकरऽऽः अध्यक्ष महोदय! हम लोगों ने वित्त उप-समिति की रिपोर्ट पर बहस सुनी, जो पिछले दो दिनों से चल रही थी। मुझे दुःख है कि यह बहस बहुत कुछ नीरस और उबा देने वाली थी। इस उप-समिति की सिफारिशों में से अधिकांश से मैं
ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि फेडरल स्ट्रक्चर कमेटी एंड माइनॉरिटीज कमेटी, खंड 1, पृ. 418
ऽऽ वही, पृ. 529-34