9. संघीय संरचना समिति - Page 162

संघीय ढांचा समिति

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बंद कर दिया जाता है, तब सीमा-शुल्क से प्राप्त होने वाला राजस्व, तो बिल्कुल समाप्त हो जाएगा। दूसरी तरफ, अगर ऐसी पार्टी सत्ता में आती है, जो मुक्त व्यापार और किसी भी प्रकार के संरक्षण में विश्वास करती है, तब फिर सीमा-शुल्क का राजस्व एक क्षीण साधन बनकर रह जाएगा, जिस पर संघ सरकार को निर्भर रहना है।

अब आइए, संघ सरकार के राजस्व के दूसरे साधन पर विचार करें - यह साधन है अफीम। भारत सरकार द्वारा प्रचारित सूचना के अनुसार, मैं देखता हूं कि भारत सरकार का यह कहना है कि अफीम के निर्यात पर उसका राजस्व खत्म हो जाएगा, जो लगभग 2 करोड़ रुपए है। लेकिन उसे दवाई के रूप में इस्तेमाल होने वाली अफीम की बिक्री से 10 या 15 लाख रुपए की आय होती रहेगी। इससे स्पष्ट होता है कि संघ सरकार को उसके राजस्व-साधनों से कितनी कम आय होती है।

उप-समिति ने संघ सरकार के लिए राजस्व का तीसरा साधन नमक-कर बताया है। अब हम सभी जानते हैं कि यह साधन झगड़े की जड़ रहा है और यह भारतीय राजनीति का एक मुद्दा बन गया है। अगर कांग्रेस पार्टी सत्ता में आ जाती है, तब यह कर तो बिल्कुल ही खत्म हो जाएगा। अब इस सवाल के बावजूद कि कांग्रेस इस कर को बिल्कुल खत्म करने में सफल होती है या नहीं, इतना तो निश्चित है कि इस कर पर निर्भर नहीं रहा जा सकता कि इससे संघ सरकार को काफी बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त होगा, क्योंकि इसका संबंध भारत में रहने वाली साधारण जनता के रहन-सहन के स्तर से है।

अब अंत में आपके विचारार्थ निगम-कर है, जिसे इस उप-समिति ने संघ सरकार के राजस्व का एक साधन बताया है। मुझे बताया गया है कि इससे लगभग 3 करोड़ रुपए की आय होती है। अतः स्पष्ट है कि इस समय इससे बहुत ही थोड़ी आय होती है। मेरा ख्याल है कि अगर हम भारत की समृद्धि के लिए उद्योगीकरण को बहुत ही आवश्यक मानते हैं और अगर हम यह भी स्वीकार करते हैं कि उद्योगीकरण के लिए पूंजी का नियमित किया जाना भी जरूरी है, तब मेरी शंका है कि हम इस कर में बहुत ज्यादा वृद्धि नहीं कर सकते। नहीं तो पूंजी को नियमित करने की प्रक्रिया प्रभावित होने लगेगी।

बजट के राजस्व पक्ष के बारे में मेरे यही विचार हैं। अब मैं व्यय पक्ष पर आता हूं। उप-समिति का यह दृष्टिकोण है कि केंद्र में सरकार का काम कुछ नहीं, बल्कि रक्षा करना है। मैं इस बात को स्वीकार नहीं करता कि आजकल के युग में हर सरकार का यही कार्य रह गया है। इतिहास में एक ऐसा समय था जब कि सरकार का उचित कार्य अव्यवस्था के साथ-साथ सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था करने के अलावा और कुछ नहीं था। लेकिन मेरा विचार यह है कि अब समय बदल गया है। हम इस बात में विश्वास करते हैं कि सरकार को सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था तो करनी ही चाहिए, लेकिन उसे कल्याण की व्यवस्था भी करनी चाहिए। यह मेरा निजी विचार है, अन्य सदस्यों के कुछ भिन्न विचार हो सकते हैं कि केंद्र में स्थित सरकार को स्वयं कुछ कल्याण कार्य शुरू