9. संघीय संरचना समिति - Page 166

संघीय ढांचा समिति

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नियंत्रित करने और उसे विधान-मंडल की इच्छा के अनुरूप ढालने के लिए समान रूप से प्रभावी नहीं है। इस दृष्टिकोण से राजस्व के साधनों को विभाजित करने की समस्या अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाती है। आप उन्हें इस प्रकार विभाजित कर सकते हैं कि इससे संघ और प्रांत, दोनों की वित्त व्यवस्था स्वायत्तपूर्ण और आत्मनिर्भर बन जाए या आप इसे इस प्रकार विभाजित कर सकते हैं कि इसके विभाजन के बाद जो वित्त व्यवस्था बने, वह आर्थिक सहायता और अंशदानों के द्वारा समायोजन किए बगैर स्वायत्तपूर्ण न हो और आत्मनिर्भर न बन सके।

आयकर पर विचार करने पर उसे राजस्व के एक संयुक्त साधन बनाए जाने का सुझाव देते समय मेरे ध्यान में यही बातें रही थीं। आयकर को राजस्व का संयुक्त साधन बनाने के दो उपाय हैं। पहला, जिसे आप साधन का पृथक्करण और आय का विभाजन कह सकते हैं और दूसरा, साधनों का आवंटन या बंटवारा और आय का विभाजन। पहले उपाय में दर निश्चित करने का अधिकार इन दोनों पक्ष में से केवल एक पक्ष का होगा और यह काम स्वभावतः संघीय सरकार का ही होगा। प्रांतों का काम और कुछ नहीं केवल कर से होने वाली आय में से सिर्फ अपना अंश प्राप्त करने का अधिकार होगा। दूसरे उपाय के अधीन दोनों को अपने-अपने यहां आयकर की दरों को निश्चित करने का अधिकार होगा। एक प्रांत आयकर की अपनी दरें निश्चित करेगा, जो उसी प्रांत में लागू होंगी। संघ आयकर की अपनी दर निश्चित करेगा, जो संघ की सभी इकाइयों में लागू होंगी। इस बारे में कि आयकर निश्चित करने और उसे वसूल करने के लिए संघीय सरकार का प्रशासन बना रहे, मेरा विचार है कि राजस्व के आवंटन के लिए दूसरा उपाय अपनाया जाना चाहिए। यह उस प्रणाली से बहुत ज्यादा भिन्न नहीं होगी, जो फ्रांस, बेल्जियम और अन्य यूरोपीय देशों में प्रचलित है। इस योजना के तहत आयकर की दो दरें होंगीः (1) संघीय दर, जो संघीय सरकार द्वारा उसकी अपनी आवश्यकता के अनुसार निश्चित की जाएगी, और (2) प्रांतीय दर, जिसे प्रांत समय-समय पर अपनी-अपनी वित्तीय आवश्यकता के अनुसार निश्चित किया करेंगे। कुल मिलाकर यह कर, जैसा कि इस समय होता है, संघीय सरकार द्वारा प्रशासित और संग्रहीत किया जाया करेगा।

इस योजना के लाभ स्पष्ट हैं। पहला, इसके फलस्वरूप अनुदान और अंशदान की पद्धति खत्म हो जाएगी और प्रत्येक इकाई की वित्तीय व्यवस्था स्वायत्तपूर्ण और आत्मनिर्भर बन जाएगी। दूसरा, इससे कार्यकारिणी में उत्तरदायित्व की भावना बनी रहेगी, क्योंकि अपनी पूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए उसे विधान-मंडल पर उसके द्वारा आयकर की दर निश्चित करने पर निर्भर रहना जरूरी हो जाएगा। तीसरा - और यह बहुत महत्त्वपूर्ण है, मेरा ख्याल है कि किसी एक प्रांत पर दूसरे प्रांत के लाभ के लिए कर नहीं लगाया जाएगा। साधन को पृथक्कृत करने की दूसरी प्रणाली के अधीन सभी प्रांतों के लिए एक ही संघीय दर होगी और आय का विभाजन होगा। इससे जो रकम किसी एक प्रांत में संग्रहीत होगी, यह जरूरी नहीं कि वह विभाजन में उसके अंश के बराबर ही हो। कुछ प्रांत ज्यादा दे