152 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कांग्रेस को कर, शुल्क, महसूल और उत्पाद शुल्क लगाने व वसूल करने,
ऋण चुकाने, अमरीका की सामान्य सुरक्षा और कल्याण की व्यवस्था करने का
अधिकार होगा, लेकिन यह सभी शुल्क, महसूल और उत्पाद शुल्क सारे अमरीका
में एक समान होंगे।
यहां पर भी आपको ऐसी कोई बात नहीं मिलती कि अमरीका में केंद्रीय सरकार की कराधान संबंधी शक्ति पर कोई भी अंकुश लगाया गया है। इसलिए जहां तक संवैधानिक कानून का संबंध है, उप-समिति ने जिस तरह की सिफारिश की है, उसके लिए कोई ठोस कारण नहीं मिलता।
मैं यह भी निवेदन करना चाहता हूं कि यह प्रश्न एक बिल्कुल बनावटी प्रश्न है, जो किसी भी देश में नहीं उठा है कि कराधान की शेष शक्तियां संघीय सरकार में निहित होनी चाहिए या ये शेष शक्तियां प्रांतों में निहित होनी चाहिए। यह प्रश्न भारत में क्यों उठा, उसका कारण यह है कि हमने अपने मौजूदा अंतरण विषयों में कराधान की एक बेतुकी प्रणाली शुरू की है, जिसे कराधान की अनुसूचियां कहा जाता है। यह कहीं पर भी नहीं है। इसे किसी भी सरकार ने या संघीय संविधान बनाने वाली किसी भी सत्ता ने कभी भी निर्धारित नहीं किया। हम लोग कराधान के क्षेत्र का ही विभाजन नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम इन अनुसूचियों को रखकर एक खास तरीका और एक खास स्वरूप निश्चित कर रहे हैं, जिसके आधार पर कराधान की शक्ति का प्रयोग किया जाएगा। मैं इसे बिल्कुल भी जरूरी नहीं समझता। पहली बात तो यह कि इससे कराधान की प्रणाली लीक में बंध जाएगी और यह हमारे भावी एक्सचेकर चांसलरों के नए-नए तरीके सोचने की ताकत को कुंद कर देगी। मेरा ख्याल है कि कोई भी एक्सचेकर चांसलर ऐसी वित्तीय प्रणाली की व्यवस्था करने का दायित्व लेना स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें कराधान संबंधी उसकी शक्तियों के बारे में ही नहीं, बल्कि किसी खास कर को लगाने की इच्छा के संबंध में उसका विवेकाधिकार सीमित होगा।
इसलिए मेरा विचार है कि हम अपने संविधान में से इन अनुसूचियों को बिल्कुल निकाल देंगे और कराधान के क्षेत्र का उस रीति से विभाजन करें, जैसा कि अन्य संघीय देशों में किया जाता है, अर्थात् प्रांतीय सरकारों पर एक साधारण-सी पाबंदी लगी होती है कि संघीय सरकार जो भी सीमा शुल्क या उत्पाद शुल्क लगाना चाहेगी, प्रांतीय सरकारें उस कर-राशि का उपयोग नहीं करेंगी और बाकी कर-राशि दोनों सरकारें, जिस प्रकार चाहेंगी आपस में विभाजित कर लेंगी। मेरा कहना है कि अन्य संघीय देशों में ठीक यही किया गया है। इसलिए मेरा विचार है कि हमें अपने संविधान में कराधान की शेष शक्तियों वाले इस सिद्धांत को शामिल करने की कोई जरूरत नहीं है।
अब मैं संघीय वित्त में राज्यों की स्थिति पर कुछ कहना चाहता हूं। जब मैंने उप-समिति की रिपोर्ट में इस पक्ष को पढ़ा, तब मैंने सहज ही यह देखने की कोशिश की