158 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
समुद्री क्षेत्र के सभी मामले, (4) सभी विवाद जिनमें अमरीका एक पक्ष का होगा, (5) दो या इससे अधिक राज्यों के बीच विवाद, (6) किसी राज्य या किसी दूसरे राज्य के नागरिक के बीच के विवाद (जो हालांकि बाद में संविधान के 11वें संशोधन के द्वारा रद्द किया जा चुका है), (7) विभिन्न राज्यों के नागरिकों के बीच के विवाद, (8) विभिन्न राज्यों की कानूनी स्वीकृति के अधीन भूमि के बारे में एक ही राज्य के नागरिकों के दावे संबंधी विवाद, और (9) एक राज्य या उसके नागरिकों और विदेशी राज्यों के नागरिकों या जनता के बीच के विवाद आते हैं। इसलिए मेरे निवेदन है कि अगर इस संघीय न्यायालय को यथा-तथ्य रूप से संघीय न्यायालय बनाना है, अर्थात् यदि उसके अधीन संघ की इकाइयों के बीच या विभिन्न इकाइयों के नागरिकों के बीच विवाद के सभी मामले शामिल किए जाते हैं, तब इस सूची को संशोधित किया जाना चाहिए और इसे संघीय कार्यक्षेत्र के अनुरूप बनाया जाना चाहिए, जैसा कि ऑस्ट्रेलिया या अमरीका आदि देशों में शामिल किया गया है।
अध्यक्ष महोदय! अगला विषय जिस पर मैं कुछ निवेदन करना चाहता हूं, वह यह है कि हालांकि भारत एक संघीय देश बनने जा रहा है, तो भी भारत अपने संघीय न्यायालय के कार्यक्षेत्र की सीमा को उतनी सीमा तक व्यापक बनाकर संतुष्ट नहीं रह सकता, जो स्थिति ऑस्ट्रेलिया और अमरीका में संघीय न्यायालयों की इस समय है। भारत के संबंध में कुछ विशेष परिस्थितियां हैं, जो इन देशों में नहीं हैं। इसलिए मेरा निवेदन है कि भारत में संघीय न्यायालय का संघीय कार्यक्षेत्र न केवल ऑस्ट्रेलिया और अमरीका के संघीय न्यायालयों के संघीय कार्यक्षेत्रों के अनुरूप होना चाहिए, बल्कि मौलिक अधिकारों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के संबंध में भी इसका कार्यक्षेत्र संघीय होना चिहए।
अध्यक्षः क्या आप अमरीका के संविधान में मौलिक अधिकारों से संबंधित खंड के बारे में हमें बताएंगे?
डॉ. अम्बेडकरः जी हां, मैं बताऊंगा।
अध्यक्षः अगर आप कुछ अन्यथा न समझें, तो हमें केवल यह बता दें कि यह कहां मिलेगा? मैं इसे खूब जानता हूं, लेकिन इस समय मैं इसे ढूंढ नहीं पा रहा हूं।
डॉ. अम्बेडकरः क्षमा करें, अभी यह मेरे पास नहीं है।
अध्यक्षः मेरे ध्यान में वह खंड आ रहा है, जो विभिन्न राज्यों में स्वतंत्र नागरिकों के विशेषाधिकारों और उनकी स्वतंत्रता और हर प्रांत और राज्य के नागरिकों को आने-जाने की स्वतंत्रता या वुछ ऐसी ही बात से शुरू होता है। फिर भी हम अब अपना समय नष्ट नहीं करेंगे, क्योंकि इस समय वह मुझे नहीं मिल रहा है। मैं अनुच्छेद IV की धारा 2 के बारे में सोच रहा था।
डॉ. अम्बेडकरः मेरा निवेदन है कि हम चाहे जिस रीति से मूल अधिकारों की परिभाषा करें या चाहे जिस रीति से हम अल्पसंख्यकों के अधिकारों की परिभाषा करें, महत्त्वपूर्ण समस्या यह है कि इनकी उचित सुरक्षा की जाए। मेरे कारण ये हैं - हम