संघीय ढांचा समिति
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श्री जिन्नाः यह मानते हुए कि ऐसी दिक्कतें तो आती हैं, आप क्या सुझाव दे रहे हैं?
डॉ. अम्बेडकरः मेरा सुझाव यह है कि इस विषय पर मेरी बहुत ही कटु प्रतिक्रिया है। मेरा यह कहना है कि आगे बहुत वर्षों तक संप्रदायवाद और प्रांतीयतावाद रहेगा। मैं निश्चयपूर्वक नहीं कह सकता कि संप्रदायवाद के इस क्षुब्ध वातावरण में सर्वोच्च न्यायालय या संघीय न्यायालय - इसे आप जो भी नाम दें - के निर्णयों का उल्लंघन किए जाने की संभावना नहीं। अल्पसंख्यकों के बारे में बोलने वाले सदस्य के रूप में, अल्पसंख्यकों के लिए जिनके पास इस समय कोई अधिकार नहीं है और जो अधिकार मांगते हैं तथा जिनका हर जगह विरोध होता है, बोलने वाले सदस्य के रूप में मैं यह निश्चयपूर्वक नहीं कह सकता कि कोई भी ऐसी प्रांतीय सरकार जिसे परिषद में सांप्रदायिक बहुमत का समर्थन प्राप्त है, उन निर्णयों और फैसलों को लागू करने के लिए सहमत होगी, जो उसके अपने हितों के अनुरूप नहीं होंगे। मेरा यही दृष्टिकोण है। मैं इसे एक बहुत ही गंभीर मामला समझता हूं। इसलिए, अध्यक्ष महोदय! मैं यह सुझाव देना चाहता हूं कि हमें संविधान में यह प्रावधान करना चाहिए कि सर्वोच्च न्यायालय के जो भी निर्णय और फैसले होंगे, वे प्रभावी होंगे। मेरा सुझाव है कि हमें उन प्रावधानों का अनुसरण करना और उन प्रावधानों को संविधान में अपना लेना चाहिए, जो ऑस्ट्रेलिया के संविधान में दिए हुए हैं। सबसे पहले, ऑस्ट्रेलियाई संविधान की धारा 118 और 51, पैराग्राफ 25, में यह प्रावधान है कि सभी कानूनों में विश्वास और निष्ठा होगी। यह कोई नई बात नहीं है। यह अमरीका के संविधान में भी मिलता है। जहां तक निर्णयायों को निष्पादित करने का प्रश्न है, ऑस्ट्रेलियाई संविधान के पैराग्राफ 34 में संघीय विधान-मंडल को ऐसे सभी मामलों के बारे में कानून बनाने का अधिकार दिया गया है, जो उसको दिए गए अधिकारों के पूरक हैं। ऑस्ट्रेलियाई संविधान में केंद्रीय सरकार को निर्णय और फैसलों को कार्यान्वित कराने के लिए कुछ विशेष अधिकार दिए गए हैं। सबसे पहले धारा 51, पैराग्राफ 24, लीजिए। इसमें अंतर्राष्ट्रीय सेवा और निर्णयों के कार्यान्वयन के लिए प्रावधान किया गया है। इसका कारण यह है कि सारे कॉमनवेल्थ में राज्यों के बीच दीवानी और फौजदारी मुकदमों की सुनवाई और निर्णय एक ही प्रक्रिया के अधीन है। फिर आप ऑस्ट्रेलियाई संविधान की धारा 78 लीजिए-
अध्यक्षः ‘संसद न्यायिक शक्ति की सीमा में आने वाले मामलों के बारे में कॉमनवेल्थ या किसी भी राज्य के खिलाफ सुनवाई करने और उस पर निर्णय के अधिकार देने के लिए कानून बना सकती है।’
डॉ. अम्बेडकरः जी हां, यह एक बात है। महोदय! जैसा कि आप जानते हैं, ऑस्ट्रेलिया में संघीय विधान-मंडल के न्याय-व्यवस्था अधिनियम 1903, भाग 9, के द्वारा इस बात के लिए निश्चित प्रावधान दिया है कि राज्यों के विरुद्ध किस प्रकार निर्णयों और फैसलों को कार्यान्वित किया जाएगा। फिर, आप ऑस्ट्रेलियाई संविधान की धारा 120 देखें -