162 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रत्येक राज्य उन व्यक्तियों को अपने-अपने जेलों में नजरबंद करने के लिए,
जो कॉमनवेल्थ के कानूनों के अधीन अपराध के जुर्म में अभियुक्त या दोषी होंगे
और उन व्यक्तियों को दंडित करने के लिए व्यवस्था करेगा, जो अपराधों के लिए
दोषी सिद्ध होंगे।
इसलिए मैं निवेदन करता हूं कि संघीय संविधान को कुछ विशिष्ट अधिकार दिए जाएं, जिससे वह संघीय न्यायालय के निर्णयों को लागू करा सके।
अध्यक्षः आपके विचार से किस प्रकार के अधिकार दिए जाने चाहिए?
डॉ. अम्बेडकरः वे लोग क्या करेंगे, यह मैं नहीं जानता? लेकिन मेरा निवेदन है कि इस मामले को इस प्रकार अधर में छोड़ना नहीं चाहिए। अध्यक्ष महोदय! मैं आपको कुछ उद्धरणों से यह बताना चाह रहा था कि अमरीका के सर्वोच्च न्यायालय सर्वथा व्यर्थ रहे हैं, जिसका कारण यह था कि उक्त न्यायालय को हमेशा इस बात की शंका रहती थी, कि उसके निर्णयों को कार्यान्वित न किया जाकर उनकी अवमानना की जा सकती है। उदाहरण के लिए एक मामले में, जो ओहियो राज्य के एक गवर्नर के बारे में है, कोई एक भागा हुआ अपराधी, जो ओहिया राज्य में आ गया है, वह गवर्नर के द्वारा सौंप दिया जाएगा। गवर्नर ने ऐसा करने से इन्कार कर दिया। तब केन्ट राज्य ने परमादेश के लिए याचिका प्रस्तुत की। न्यायालय ने इसके उत्तर में कहाः ‘संविधान ने हमें अपने आदेश को कार्यान्वित कराने का अधिकार नहीं दिया है, इसलिए हम परमादेश नहीं देंगे।’ यह ऐसा ही हुआ, हालांकि उक्त न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि गवर्नर उस व्यक्ति को सौंपने के लिए प्रतिबद्ध है। मैं ऐसे सैकड़ों मामले उद्धृत कर सकता हूं, जिनमें अमरीका के सर्वोच्च न्यायालय ने किसी भी प्रकार की राहत देना सिर्फ इसलिए अस्वीकार कर दिया कि उसे यह शंका घेरे हुए थी कि उसके निर्णयों को कार्यान्वित नहीं किया जाएगा। जब तक हमारे पास इस संबंध में किसी प्रकार का कोई प्रावधान नहीं होगा, मैं नहीं समझता कि स्थिति निरापद रहेगी।
अध्यक्षः किस प्रकार का कानून? क्या आप यह कहना चाहते हैं कि, उदाहरण के तौर पर, अगर कोई निर्णय बंगाल के खिलाफ दिया जाता है तब आप किसी बेलिफ (कारिन्दे) को बंगाल में भेज देंगे?
डॉ. अम्बेडकरः मैं धारा 78 में जो कुछ पाता हूं, उसके आधार पर मेरा आशय यह है कि दीवानी डिग्री के मामले में वित्त मंत्री (ट्रेजरार) या जो कोष या ट्रेजरी का इंचार्ज है, वह भुगतान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अध्यक्षः अगर वह ऐसा नहीं करता तब क्या होगा?
डॉ. अम्बेडकरः मेरा विचार है कि न्यायालय उसे अवमानना करने के अपराध में पेश होने के लिए कहेगा।
माननीय मानेकजी दादाभाईः उस पर मुकदमा कहां चलाया जाएगा?
डॉ. अम्बेडकरः संघीय न्यायालय द्वारा, जहां भी वह निर्देश देगा।
श्री आयंगरः अवमानना का वारंट कौन लागू करेगा?