संघीय ढांचा समिति
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डॉ. अम्बेडकरः संघीय सरकार अपने अधिकारियों के द्वारा। मैं चाहता हूं कि संघीय सरकार के पास ऐसा अधिकार हो। यह अमरीका के संविधान में निहित शक्तियों में से एक है। और ऑस्ट्रेलियाई संविधान की धारा 120 के अधीन संघीय सरकार को उन लोगों को अपनी हिरासत में लेने का अधिकार है, जो संघीय कानून का उल्लंघन करते हैं। कल्पना कीजिए कि कोई संघीय कानून पारित किया गया और किसी राज्य का कोई नागरिक उसका निराकरण करता है और सर्वोच्च न्यायालय उसके विरुद्ध निर्णय देता है तथा राज्य की भावनाएं इतनी तीव्र हैं कि वह उसे जेल में नहीं रखना चाहता, तब मेरे विचार में धारा 120 में प्रदत्त शक्तियों के अधीन, संघीय सरकार की अपनी जेलें होनी चाहिए। अगर संघीय सरकार यह चाहती है कि सभी मामलों में न्याय हो, तब उसे इस बात की भी शक्ति प्राप्त होनी चाहिए एक वह निर्णयों को लागू करा सके। वह इस कार्य को कैसे करेगी, इस पर मैं आगे क्या कहूं? मैं तो इतना ही कह सकता हूं कि संविधान में संघीय सरकार को यह शक्ति दी जानी चाहिए कि वह सारे भारत में निर्णयों और फैसलों का कार्यान्वयन सुनिश्चित करा सके। मुझे यहां यह दुबारा कहने की जरूरत नहीं जान पड़ती कि अगर इसके लिए किए गए उपाय निष्प्रभावी रहते हैं, तब उसका अधिकार भी निष्प्रभावी हो जाता है।
श्री जयकरः यदि जातीय या सांप्रदायिक दंगों की स्थिति बन जाती है, तब ऐसा कोई भी उपाय नहीं हो सकता, जो कारगर कहा जा सके।
डॉ. अम्बेडकरः यह सवाल मेरे जवाब देने का नहीं है। मैं अपना मामला खुद उठाऊंगा। कल्पना कीजिए कि बंबई प्रेसिडेंसी में एक नागरिक सत्याग्रह होता है और यह हमारा एक मूल अधिकार है - मंदिर में प्रवेश करने का अधिकार, जिसका उल्लेख मैंने इस ज्ञापन में किया, जो मैंने प्रस्तुत किया है। कल्पना कीजिए कि मजिस्ट्रेट यह आदेश देता है कि हम लोग शांति भंग कर रहे हैं और अगर हम इसे रोकते नहीं हैं, तब हमें कैद कर लिया जाएगा। कल्पना कीजिए कि हम संघीय न्यायालय से उसके उस अधिकार के तहत अनुरोध करते हैं, जिसके बारे में मैंने कहा है कि ये अधिकार उसे मिलने ही चाहिए और संघीय न्यायालय यह निर्णय देता है कि मजिस्ट्रेट ने गलती की है। कल्पना कीजिए कि हम इस आदेश के कार्यान्वयन के लिए गृह सदस्य से अनुरोध करते हैं। यह गृह सदस्य, यदि कट्टठ्ठरपंथियों के प्रभाव में है, तो वह कहेगा, ‘मैं यह नहीं कर सकता।’ मैं चाहता हूं कि ऐसी परिस्थिति में अपने कानूनों को प्रभावी बनाने के लिए केंद्रीय सरकार के पास शक्ति हो।
श्री जिन्नाः मैं सोचता हूं कि आप जो कुछ कह रहे हैं, उसमें बहुत वजन है कि किसी डिक्री या वारंट पर अमल कराने के लिए इसके पीछे सबसे पहले तो पुलिस की ताकत हो और दूसरे आखिरी ताकत फौज है। जब तक आपकी संघीय सरकार के सदस्य के पास फौज नहीं होगी, तब तक आप यह उम्मीद किस तरह कर सकते हैं कि वह डिक्री या वारंट पर अमल करा सकेगा?
डॉ. अम्बेडकरः उसके पास यह सब होगा। मैं उन पर कोई सीमा नहीं लगा रहा हूं। मैं उन्हें वे सारे अधिकार दूंगा, जो वे इस कार्य के लिए जरूरी समझते हैं। यह उस हद