संघीय ढांचा समिति
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डॉ. अम्बेडकरः जी हां। ऐसी स्थिति भारत में पैदा नहीं होनी चाहिए।
लॉर्ड लोथियनः अमरीका में क्या यह फर्क नहीं है कि वहां संघीय सरकार तब तक कार्रवाई कर सकती है, जब तक कोई मामला किसी व्यक्ति के खिलाफ होता है। लेकिन यह प्रश्न ‘कनवेंशन’ में उठा था और उन्होंने यह निर्णय किया कि संघीय सरकार किसी राज्य के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगी, क्योंकि कोई राज्य किसी दूसरे राज्य के खिलाफ युद्ध करके ही कोई कार्रवाई कर सकता है और इसलिए उन्होंने इस दायित्व को पूरा करने के लिए राज्य पर दबाव डालने का काम समाज पर छोड़ दिया। आप भी किसी सीमा तक व्यक्ति के मामले में ऐसा कर सकते हैं, लेकिन आप संघ में अपनी संवैधानिक व्यवस्था के अंग के रूप में युद्ध का रूप दिए बगैर किसी संघीय सरकार को किसी राज्य के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रावधान नहीं कर सकते और कोई ऐसा करेगा भी नहीं। यही आपकी कठिनाई है।
डॉ. अम्बेडकरः मैं इस बारे में नहीं जानता। लेकिन जैसा कि मैंने कहा, अमरीका में भी विद्रोह को दबाने के लिए वहां के प्रेसिडेंट को सेना का इस्तेमाल करने का अधिकार मिला हुआ है।
लॉर्ड लोथियनः और यही युद्ध का कार्य बन जाता है। यह विगत दिनों में हुआ है।
डॉ. अम्बेडकरः अमरीका के संविधान में इसका प्रावधान है।
श्री जयकरः लेकिन निश्चय ही विकल्प इन्हीं दो में से होगा - गृह युद्ध या संघ के प्रति निष्ठा।
डॉ. अम्बेडकरः यही मैं भी अनुभव करता हूं। आप जो बात कहना चाह रहे हैं, मैं उसके महत्त्व को अस्वीकार नहीं कर रहा हूं। मैं जो बात कह रहा हूं, वह यह है कि हमारे यहां वैसी स्थिति नहीं होनी चाहिए, जैसी कि हम अमरीका में देखते हैं, हालांकि वहां संघीय कार्यक्षेत्र में से उत्पन्न होने वाले झगड़ों को निपटाने के लिए संघीय न्यायालय हैं, लेकिन संघीय सरकार के पास इन निर्णयों को प्रभावी बनाने के लिए कोई अधिकार नहीं है। मैं यह कहना चाहता हूं कि हमारी संघीय सरकार या संघीय विधान-मंडल के पास उस तरह की शक्ति होनी चाहिए जैसी कि ऑस्ट्रेलियाई संघीय सरकार या संघीय विधान-मंडल के पास है।
श्री जिन्नाः यहां अंतर यह है कि अमरीका में संघीय सरकार के पास सेना का प्रभार और उसका नियन्त्रण है। आपका यह कहना है कि संघीय सरकार, जो आप प्रस्तावित कर रहे हैं, सेना का नियंत्रण और उसका दायित्व तुरंत अपने अधिकार में ले ले।
डॉ. अम्बेडकरः ठीक है, यदि अभी नहीं तो बाद में ही सही।
श्री जिन्नाः इस बीच में क्या होगा?
डॉ. अम्बेडकरः जैसा कि मैंने कहा, यह जुदा मामला है। सेना का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
श्री जयकरः आपको सेना की सहायता लेने के लिए ‘क्राउन’ के पास जाना पड़ेगा।