9. संघीय संरचना समिति - Page 183

166 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. अम्बेडकरः जी हां।

श्री जयकरः सेना पर अंततः अधिकार ‘क्राउन’ का है।

डॉ. अम्बेडकरः मैं जिस बात पर जोर दे रहा हूं, इससे वह कम नहीं होता। संघीय विधान-मंडल को अधिकार देना ही होगा। अमरीका में राज्यों द्वारा लोगों को फांसी दी जा रही है, हालांकि इसके खिलाफ वहां के सर्वोच्च न्यायालय ने त्रुटि-याचिका (रिट ऑफ एरर) जारी की है।

अध्यक्षः मैंने इंग्लिश कॉमन लॉ के बारे में ऐसी टिप्पणी सुनी है कि यह देखने के लिए कि कोई पौधा बढ़ रहा है या नहीं, उसे बार-बार उखाड़ने और उसकी जड़ों को देखने से कोई लाभ नहीं। इंग्लिश कॉमन लॉ ऐसी कोई बात नहीं स्वीकार करेगा और यही और कानूनों के बारे में भी है। आप बड़ा रोचक कानूनी पेंच सुना रहे हैं और संक्षेप में इसका जवाब यह है कि कोई भी आदमी किसी भी चीज को बेकार कर सकता है। किसी नींव के बारे में यह पता लगाने के लिए कि वह ठीक से रखी गई या नहीं, उसे बार-बार उलटने-पलटने से कोई प्रयोजन पूरा नहीं होता। आपको लोगों की सद्भावना पर कुछ तो विश्वास करना चाहिए। वर्जीनिया के मामले में लोगों को सही रास्ते पर आने में लगभग 19 साल लग गए। शायद यह आपके मामले में भी ऐसा ही हो। शुरू में ये दिक्कतें होंगी। लेकिन जब आप साथ-साथ काम करने लगेंगे, तब इनमें से बहुत-सी दिक्कतें दूर हो जाएंगी। आप अपने मकान की नींव हर तीन हफते के बाद यह देखने के लिए नहीं खोद सकते कि यह दुरुस्त है या नहीं। आपको लोगों पर कुछ विश्वास करना ही चाहिए।

डॉ. अम्बेडकरः मैं तो यही कहूंगा कि हमें अपनी नींव बालू में नहीं बनानी चाहिए।

अब इस विषय के तीसरे मुद्दे पर आइए, अर्थात् संघीय न्यायालय का गठन। मैं इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता, क्योंकि जो कुछ कहा जा चुका है, उससे मैं सहमत हूं। मैं एक सुझाव अवश्य देना चाहता हूं कि हमें इस मामले में ऑस्ट्रेलियाई मॉडल अपना लेना चाहिए। इससे हम एक संघीय अपील न्यायालय ही नहीं गठित कर सकेंगे, बल्कि सारे भारत के लिए सर्वोच्च अपीली न्यायालय भी गठित कर लेंगे, जैसा कि ऑस्ट्रेलिया में है। इस न्यायालय में न सिर्फ न्यायालयों की, जिसका कार्यक्षेत्र संघीय है, अपीलों की सुनवाई की जाती है, बल्कि ऐसे मामलों पर न्यायालयों की अपीलों की भी सुनवाई की जाती है, जो संघीय कार्यक्षेत्र से बाहर पड़ते हैं।

मैं खास तौर से यह बताना चाहता हूं कि संघीय विधान-मंडल को इस बात की पूरी छूट होनी चाहिए कि वह भारतीय राज्यों के न्यायालयों को संघीय कार्यक्षेत्र सौंप सके, जिससे कि वह इन न्यायालयों की सेवाओं का उपयोग कर सके। संघीय दायित्व सिर्फ प्रांतों में स्थित उच्च न्यायालयों को ही नहीं सौंपा जाना चाहिए, बल्कि राज्यों के कुछ चुनिंदा न्यायालयों को, जो संघीय विधान-मंडल की जानकारी में कुशलतापूर्वक