170 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
‘या विधान-मंडल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व’
अध्यक्षः धन्यवाद, खेद है कि हमसे यह छूट गया और मैं डॉ. अम्बेडकर का भी कृतज्ञ हूं। इन संशोधनों को शामिल कर लेंगे। यह भूल से हो गया।
श्रीमती सुब्बरायनः पिछली बार, विधान-मंडलों के बारे में नामजद सदस्यों के अमूल्य विचारों की सराहना करते हुए मैंने नए संविधान में नामजदगी के प्रश्न पर सिद्धांत के तौर पर आपत्ति की थी। जब मैं यह देखती हूं कि दोनों सदनों को समान अधिकार प्राप्त होंगे तब मैं सोचती हूं कि मुझे और ज्यादा आपत्ति करनी चाहिए। मैं रिपोर्ट में कही गई इस बात से पूरी तरह सहमत हूं कि वरिष्ठ राजनेताओं की सेवाएं बहुत ही मूल्यवान होती हैं, लेकिन मैं इस बात से भी पूरी तरह विश्वस्त हूं कि नामजदगी की प्रणाली अविवेकपूर्ण और अलोकतांत्रिक है और इसलिए यह कहीं ज्यादा अच्छा होगा कि हम ऐसे लोगों को भी चुनाव पद्धति के आधार पर लें। अगर नामजदगी की प्रणाली रहती है, तब मेरे विचार में इस खंड का सारा उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा और मंत्रालय उच्च सदन में अपने दल को मजबूत बनाने पर ही ध्यान रखेगा। मैं इसलिए पैराग्राफ 32 में उसकी 7, 10, 19 और 22वीं पंक्तियों में ‘पुरुषों’ के स्थान पर ‘व्यक्तियों’ शब्द रखे जाने का सुझाव देती हूं।
अध्यक्षः श्रीमती सुब्बरायन, मैं सहमत हूं। इंग्लैंड में लगभग पांच वर्ष पहले हम वास्तव में यही समझते थे कि कोई महिला ‘व्यक्ति’ नहीं होती।
श्रीमती सुब्बरायनः शायद वे समझते थे कि वह इससे कुछ अच्छी होती हैं।
श्री जफरुल्ला खांः हमारे जनरल क्लाज़ेज़ एक्ट में यह कहा गया है कि जहां कहीं ‘मैन’ (पुरुष) शब्द का प्रयोग हुआ, उसमें ‘वूमैन’ (महिला) शब्द निहित है।
श्री आयंगरः मेरी मित्र श्रीमती सुब्बरायन ने नामजद सदस्यों के बारे में जो कुछ कहा, मैं उससे सहमत हूं। मैं इस बात से भी सहमत हूं कि उच्च सदन में वरिष्ठ राजनेताओं का होना अत्यंत लाभप्रद रहेगा। लेकिन यदि देश को इन वरिष्ठ राजनेताओं की सचमुच ही जरूरत है, तब निश्चित ही ये किसी भी निर्वाचन-क्षेत्र से चुनकर आ सकते हैं। मेरा ख्याल है कि यह नामजदगी या सिद्धांत ही खराब है और हमें इसे बिल्कुल ही छोड़ देना चाहिए।
डॉ. अम्बेडकरः श्रीमती सुब्बरायन ने जो कुछ कहा उससे मैं सहमत हूं।
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अध्यक्षऽः हम यह कहेंगे फ्उन विशेष प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए जो महिलाओं के लिए अपेक्षित होंगे, उच्च सदन में अभ्यर्थियों के लिए आदर्श रूप ग्रहण किया जाना चाहिएय्।
डॉ. अम्बेडकरः मुझे 34वें पैराग्राफ के इस भाग को - ‘राज्य परिषद में सदस्यता योग्यता के लिए आदर्श’ स्वीकार करने में कई आपत्तियां हैं। मुझे ऐसा लगता है कि इससे दलित वर्ग का प्रतिनिधित्व होना पूरी तरह रुक जाएगा।
ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि फेडरल स्ट्रक्चर कमेटी एंड माइनॉरिटीज कमेटी, खंड 1, पृ. 886