संघीय ढांचा समिति
171
अध्यक्षः हमें ऐसा नहीं करना चाहिए।
डॉ. अम्बेडकरः मताधिकार समिति को स्वतंत्रता भी होनी चाहिए कि वह आदर्श नियम बनाते समय इस बात का ध्यान रखे।
* * * *
डॉ. अम्बेडकरऽः मैं यह कहना चाहता हूं कि समिति को इस बात पर भी विचार करना चाहिए कि केंद्रीय सरकार को आपात स्थिति के मामलों में प्रत्यक्ष रूप से और अकेले ही अपने लिए वित्त व्यवस्था करने का अधिकार दिया जाए, बजाए इसके कि वह प्रांतों और राज्यों से प्राप्त होने वाले अंशदान पर निर्भर रहे।
लॉर्ड पीलः इन सब बातों पर, निश्चय ही, हर दृष्टिकोण से विचार किया गया था और यह विभिन्न दृष्टिकोण के समन्वित करने का फल था। मेरा ख्याल है कि इस समय मैं सिर्फ इतना ही कह सकता हूं।
श्री जोशीः अध्यक्ष महोदय! मैं डॉ. अम्बेडकर के दृष्टिकोण से सहमत हूं।
डॉ. अम्बेडकरः अध्यक्ष महोदय! मैं यह भी कहना चाहता हूं कि तथ्य जांच समिति (फैक्ट फाइंडिंग कमेटी) को संघीय विधान-मंडल के भार को ब्रिटिश प्रांतों और भारतीय राज्यों में आवंटित करते समय इन दोनों में औचित्य के सिद्धांत पर विचार करना चाहिए था।
अध्यक्षः निस्संदेह इस बात पर लॉर्ड पील विचार करेंगे। आपसे अनुरोध है कि जब हम इस पर पूर्ण सम्मेलन में विचार करेंगे, तब इसका पुनः उल्लेख करें। आशा है, आप बुरा नहीं मानेंगे।
पैंतालीसवीं बैठक - 4 नवंबर 1931
अध्यक्षऽऽः अब यह रिपोर्ट लीजिए जिस पर मैं आपकी टिप्पणियां चाहता हूं। कृपया क्या आप पिछले पैराग्राफ संख्या 52 पर विचार प्रकट करेंगे?
डॉ. अम्बेडकरः क्या मैं पैराग्राफ संख्या 52 के संबंध में यह टिप्पणी कर सकता हूं? अध्यक्ष महोदय! आपको याद होगा कि जब हम संघीय न्यायालय के अधिकार-क्षेत्र के बारे में विचार-विमर्श कर रहे थे, मैंने संविधान का निर्वचन करने और यह सुनिश्चित करने के लिए यह मुद्दा उठाया था कि न प्रांतीय सरकारें और न ही संघीय सरकार एक-दूसरे के कार्यक्षेत्र में दखल करें। संघीय न्यायालय को मूल अधिकारों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से संबंधित मामलों की सुनवाई और उन पर निर्णय देने का अधिकार होना चाहिए। मेरा
ख्याल है कि इस संबंध में श्री यजकर ने और अगर मैं सही हूं, तो श्री शास्त्री ने भी मेरा समर्थन किया था। संभवतः इस संबंध में इस पैराग्राफ में कुछ टिप्पणी जोड़ी जाएगी।
ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि फेडरल स्ट्रक्चर कमेटी एंड माइनॉरिटीज कमेटी, खंड 1, पृ. 899-900
ऽऽ वही, पृ. 908