174 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मुझे इस समिति के सम्मुख विभिन्न विधान-मंडलों में हम कितना प्रतिनिधित्व चाहते हैं, उसकी मात्रा का सुझाव देते हुए एक विवरण प्रस्तुत करना है। मेरा ख्याल है कि इसके अलावा मुझे और कुछ कहना शेष नहीं रह गया है। लेकिन जो बात मैं शुरू में स्पष्ट कर देना चाहता हूं वह यही है। मुझे यह सुनकर बड़ी खुशी हुई कि सांप्रदायिक समस्या को सुलझाने के बारे में और बातचीत चल रही है, लेकिन यह बात शुरू से ही स्पष्ट कर देना चाहता हूं। मैं यह नहीं चाहता कि इस सवाल पर बाद में कोई संदेह रह जाए। जो लोग समझौता कर रहे हैं, उनको यह जान लेना चाहिए कि उन्हें कोई पूर्णाधिकार प्राप्त नहीं है। श्री गांधी का कांग्रेस के लोग हैं, चाहे जिसके भी प्रतिनिधि हों, वह हमें बांधकर रखने की स्थिति में नहीं हैं, बिल्कुल भी नहीं। मैं इस बैठक में ज्यादा से ज्यादा जोर देकर कह रहा हूं।
दूसरी बात जो मैं कहना चाहता हूं, वह यह है कि विभिन्न अल्पसंख्यक वर्गों ने जो दावे प्रस्तुत किए हैं, वे ऐसे दावे हैं, जो उनके द्वारा इस बात का विचार किए बिना प्रस्तुत किए गए हैं कि वे अन्य अल्पसंख्यक वर्गों के दावे के अनुरूप हैं अथवा नहीं। इसलिए एक ओर अगर किसी अल्पसंख्यक को और दूसरी ओर कांग्रेस या उस बात के लिए अन्य के बीच कोई समझौता अन्य अल्पसंख्यकों के दावों पर विचार किए बिना होता है, तब जहां तक मेरा संबंध है, वह हरगिज भी संभव नहीं होगा। मेरा झगड़ा इस बात को लेकर नहीं है कि किसी खास समुदाय को अहमियत दी जाए या नहीं। लेकिन मैं यह बात जोर देकर कहना चाहता हूं कि जो भी अहम् होने का दावा करता है और जो कोई उसे स्वीकार करता है, उसे मेरी अनदेखी नहीं कर देना चाहिए। वह ऐसा नहीं कर सकता। मैं इस बात को बिल्कुल बेबाक कर देना चाहता हूं।
माननीय हेनरी गिडनेः मैं कुछ कहना चाहता हूं। मैं पूरी तरह से अपने मित्र डॉ. अम्बेडकर से सहमत हूं। एक छोटे से समुदाय का प्रतिनिधि, जैसा कि मैं हूं - मैं नहीं समझता कि इस बातचीत में मेरा कोई स्थान है। अगर एक ओर कांग्रेस दूसरी ओर मुसलमानों से कोई समझौता कर लेती है, तब अन्य अल्पसंख्यकों का क्या स्थान रहेगा? आप चाहते हैं कि हम अपने सारे मतभेद आपस में सुलझा लें और इन्हें एक-एक कर प्रस्तुत करें। हमने ऐसा ही किया है। पिछली कांफ्रेंस में मैंने छोटे से समुदाय की, जिसका मैं प्रतिनिधि हूं, न्यूनतम मांगें प्रस्तुत की थीं। मैं यह बात स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि भारत का यह नक्शा तैयार करने में हर अल्पसंख्यक को इसमें अपने अस्तित्व को सुरक्षित रखने का पूरा अधिकार होना चाहिए। अगर सारा समझौता केवल हिन्दू-मुस्लिम समझौता बनेगा, तब इसमें मैं अपनी स्थिति को नहीं देख पा रहा हूं।
अध्यक्षऽः कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। यह ऐसी संस्था है, जिसमें अंतिम रूप से समझौता हो जाना चाहिए। यहां सुझाव सिर्फ यह है कि अगर कोई ऐसा अल्पसंख्यक
ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि फेडरल स्ट्रक्चर कमेटी एंड माइनॉरिटीज कमेटी, खंड 1, पृ. 1338-39